नए कृषि कानूनों को लेकर गुस्से ने भड़काई पंजाब में पराली की आग, तोड़ा 4 सालों का रिकॉर्ड

नई दिल्ली। पंजाब में इस मौसम में पराली जलाने की लगभग 74,000 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो 4 सालों में सबसे ज्यादा हैं। विशेषज्ञों व किसान नेताओं का कहना है कि कृषि कानूनों को लेकर किसानों में गुस्सा और सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय के आदेशानुसार किसानों को वित्तीय प्रोत्साहन नहीं दिया जाना, इसके प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा लॉकडाउन के कारण मजदूरों के अपने राज्य चले जाने के कारण लेबर न मिलना इस गुस्से की आग में घी का काम कर रहा है।

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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आई.ए.आर.आई.) के एक अधिकारी ने कहा कि 4 से 7 नवम्बर के बीच पराली जलने की घटनाएं चरम पर पहुंच गई थीं। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता निगरानी एजैंसी सफर के अनुसार, दिल्ली-एन.सी.आर. के प्रदूषण में पराली की हिस्सेदारी 5 नवम्बर को 42 प्रतिशत तक पहुंच गई, जब क्षेत्र में पराली जलने की 4,135 घटनाएं दर्ज की गई थीं।

पंजाब सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि इस साल बहुत बढ़िया फसल हुई है, इसलिए फसल के अवशेषों की मात्रा भी अधिक रही। यह भी प्रतीत होता है कि किसान सहयोग करने को तैयार नहीं हैं। कृषि कानून को लेकर गुस्सा हो सकता है। किसान खुश नहीं हैं क्योंकि सरकार ने उनके लिए वित्तीय प्रोत्साहन नहीं दिया है, जिसका निर्देश उच्चतम न्यायालय ने पराली जलाने से रोकने के लिए दिया था।

किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने सरकार को किसानों को प्रोत्साहन राशि देने का निर्देश दिया था जिसके बाद पंजाब और हरियाणा की सरकारों ने पिछले साल छोटे और गरीब किसानों को 2,500 रुपए प्रति एकड़ देने की घोषणा की थी। किसानों का कहना है कि इस प्रोत्साहन राशि से उन्हें पराली को ठिकाने लगाने में होने वाले खर्च में मदद मिल सकती है।

भारतीय किसान संघ पंजाब के महासचिव हरिंदर सिंह लक्खोवाल ने भी कहा कि पराली जलाने की घटनाएं इस साल बहुत अधिक हुई हैं और कृषि कानूनों को लेकर गुस्सा इसका एक प्रमुख कारण है। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण लोगों के अपने मूल राज्यों को लौट जाने के कारण हुई मजदूरों की अनुपलब्धता भी एक कारण है इसलिए किसान जल्दी से अपने खेतों को खाली करने के लिए पराली जला रहे हैं।

पराली जलाने के पंजाब सुदूर संवेदन केंद्र के आंकड़े

21 सितम्बर से 14 नवम्बर (2020) : 73,883 घटनाएं
21 सितम्बर से 14 नवम्बर (2019) : 51,048 घटनाएं
21 सितम्बर से 14 नवम्बर (2018) : 46,559 घटनाएं
21 सितम्बर से 14 नवम्बर (2017) : 43,149 घटनाएं

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