सीएम अमरिंदर के रुख से पंजाब की आइपीएस लॉबी में नाराजगी

चंडीगढ़। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा फटकार लगाने और कड़े तेवर दिखाने से राज्‍य की अाइपीएस लॉबी में रोष है। राज्‍य के दस डीजीपी व 17 एडीजीपी को फटकार लगाए जाने से आइपीएस लॉबी में बेहद नाराज है। यह पहला मामला है जब सूबे के सबसे वरिष्ठ पुलिस अफसरों को आइएएस अफसरों के सामने मुख्यमंत्री ने किसी बैठक में लताड़ लगाई हो।सीएम अमरिंदर के रुख से पंजाब की आइपीएस लॉबी में नाराजगी

मुख्यमंत्री ने आइएएस अफसरों के सामने आइपीएस अफसरों को लगाई थी फटकार

मुख्यमंत्री के इस रुख को देखने के बाद मुंह लटकाकर बैठक से बाहर निकले अधिकारियों के दफ्तरों में वीरवार को खुलकर इस बारे में बहस होती रही कि आइएएस के सामने आइपीएस को लताड़ लगाने का तरीका सही नहीं है। मुख्यमंत्री ने तीन दिन पहले भी डीजीपी विवाद शुरू होने के बाद पुलिस अफसरों को स्पष्ट आदेश दिए थे कि वह विवाद को खत्म करके अपने काम व लक्ष्य पर फोकस करें। डीजीपी के बीच में विवाद निपटारे के लिए उन्होंने चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी सुरेश कुमार की अगुवाई में गृह सचिव एनएल कलसी व डीजीपी सुरेश अरोड़ा की टीम बनाई थी।

अभी थमा नहीं है पुलिस उच्चाधिकारियों का विवाद, अब शुरू हुई कूटनीति

दो दिन की कोशिशों के बाद भी जब तीनों डीजीपी एक टेबल पर नहीं बैठ सके तो मुख्यमंत्री ने बुधवार को सभी डीजीपी व एडीजीपी की बैठक बुलाकर उनकी सुने बिना सख्त लहजे में आदेश दिया था कि विभागीय मुद्दों से जुड़े पर्सनल विवादों को अधिकारी आपस में सुलझाएं। ऐसे मामलों को लेकर अगर कोई भी अदालत या मीडिया में जाएगा तो उसके खिलाफ बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

डीजीपी व एडीजीपी को मुख्यमंत्री के अलावा मौके पर मौजूद सुरेश कुमार व  कलसी ने भी अनुशासन का पाठ पढ़ाया था। पुलिस अफसरों को यह रवैया रास नहीं आ रहा है कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आइएएस अफसर उन्हें अनुशासन का पाठ पढ़ाएं। यह बात तमाम आइपीएस को हजम नहीं हो रही है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में इसका परिणाम आइएएस व आइपीएस लॉबी में शीतयुद्ध के रूप में सामने आना तय है। यही वजह है कि बुधवार को बैठक खत्म होने के बाद से ही आइपीएस लॉबी में कूटनीति शुरू हो गई है। 

यह था विवाद

डीजीपी (एचआरडी) एसके चटोपाध्याय ने बीते सप्ताह हाईकोर्ट में अर्जी देकर आरोप लगाए थे कि डीजीपी सुरेश अरोड़ा व डीजीपी (इंटेलिजेंस) दिनकर गुप्ता के इशारे पर इंद्रप्रीत चड्ढा आत्महत्या मामले की जांच कर रही एसआइटी के हेड आइजी एलके यादव उनके पर नाजायज दबाव बना रहे हैं। उन्होंने अर्जी में यह भी कहा था कि नशे के मामले को लेकर चूंकि वह मोगा के एसएसपी राजजीत सिंह की भूमिका की जांच हाईकोर्ट के आदेशों पर कर रहे हैं, इसलिए अरोड़ा व गुप्ता के इशारे पर यादव दबाव बना रहे हैं।

नतीजतन, वह एसआइटी की जांच में शामिल नहीं हुए हैं। हाईकोर्ट ने उसी दिन चटोपाध्याय के खिलाफ जांच पर रोक लगा दी थी। दूसरी तरफ तीन डीजीपी के बीच आरोपों के मामले को लेकर सरकार भी चिंतित थी। यह पहली बार हुआ था जब पुलिस के टाप तीन अफसर ड्रग्स व आत्महत्या जैसे मामलों को लेकर आमने-सामने हुए हों।

एसएसपी अदालत जा सकता है तो डीजीपी क्यों नहीं

आइपीएस लॉबी में सरकार के इस फैसले को लेकर काफी रोष है कि कोई भी उच्च पुलिस अधिकारी अपने पद व विभाग से जुड़े पर्सनल आरोपों को लेकर अदालत नहीं जा सकता है। कई आइपीएस का मानना है कि सरकार उस समय क्यों नहीं जागी जब एसटीएफ के खिलाफ एसएसपी राजजीत हाईकोर्ट गए थे।

राजजीत ने हाईकोर्ट में कहा था कि निजी रंजिश के चलते एसटीएफ उन्हें नशा तस्करी में फंसे बर्खास्त इंस्पेक्टर इंद्रजीत के साथ संबंधों को लेकर नशे के झूठे केस में फंसाना चाहती है। आइपीएस का कहना है कि जब आत्महत्या मामले में चटोपाध्याय ने अदालत की शरण ली तो सरकार को इतना गुस्सा क्यों आया, सरकार खुद निष्पक्ष जांच क्यों नहीं करवा लेती।

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