लखनऊ पहुंचे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, किया सरकार और संगठन को लेकर मंथन

लखनऊ। बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह लखनऊ पहुंच चुके हैं । उनके आगमन से पहले ही एयरपोर्ट पर स्वागत करने सरकार के तमाम मंत्री पहुंच गये। उन्होनें अमित शाह का जोरदार स्वागत किया। स्वागत करने वालों में उप मुख्य मंत्री केशव प्रसाद मौर्या, उप मुख्य मंत्री दिनेश शर्मा मौजूद हैं। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और मुख्यमंत्रीलखनऊ पहुंचे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, किया सरकार और संगठन को लेकर मंथन योगी आदित्यनाथ  नें लखनऊ में ज्योतिबा फुले जी महाराज की जयंती पर समतामूलक चौराहे पर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। 

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आज लखनऊ में सरकार और संगठन को लेकर वह मंथन करेंगे। तमाम चुनौतियों से जूझ रही भाजपा के लिए उनके इस दौरे से नई दिशा तय होगी। भाजपा ने मंगलवार को भी अमित शाह के कार्यक्रम की अधिकृत सूचना जारी नहीं की। यहां पर अमित शाह मुख्यमंत्री आवास पर सरकार और संगठन से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विमर्श करेंगे। शाम को भाजपा मुख्यालय में भी वह प्रमुख लोगों के साथ विमर्श करेंगे। बुधवार की रात को ही उनकी वापसी हो सकती है। उल्लेखनीय है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने से पहले अमित शाह उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे हैं।

भाजपा सरकार के सामने कई चुनौतियां 

2014 के लोकसभा चुनाव की सफलता का ताना-बाना उनकी ही अगुवाई में बुना गया। शाह उत्तर प्रदेश की हर स्थिति से वाकिफ हैं। यह अलग बात है कि प्रदेश में एक वर्ष से अधिक समय की भाजपा सरकार के सामने कई तरह की चुनौतियां खड़ी हुई हैं। यह चुनौती 2019 के लोकसभा चुनाव को लेकर कई मायने रखती है। संगठन और प्रबंधन के अनुभवी शाह नई राह की भूमिका तैयार करेंगे। माना जा रहा है कि असंतोष दबाने का वह नया फार्मूला दे सकते हैं। इस समय भाजपा के आधा दर्जन दलित सांसदों का सुर विद्रोही है। एक-दो विधायकों ने भी असंतोष जाहिर किया है। भाजपा में सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर पहले से ही बिगुल बजाए हैं।

विधान परिषद चुनाव की उम्मीदवारी

अति पिछड़ों और अति दलितों को श्रेणीवार आरक्षण उनका बड़ा मुद्दा है और विधानसभा सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसकी घोषणा भी कर चुके हैं। विधान परिषद की 13 सीटों के लिए नामांकन शुरू है। भाजपा को 11 सीटें मिलनी तय है। अभी तक भाजपा अपने उम्मीदवार घोषित नहीं कर सकी है। सहयोगी दलों के समन्वय तथा जातीय, क्षेत्रीय और ताजा चुनौतियों को लेकर संतुलन साधने में अमित शाह इस अवसर का उपयोग करेंगे। शाह के दौरे को लेकर मंत्रियों की भी धड़कन बढ़ गई है। कुछ मंत्रियों के परफार्मेंस ठीक नहीं है। संकेत है कि कर्नाटक चुनाव के बाद फेरबदल हो सकता है। अमित शाह संगठन और सरकार को चुस्त-दुरुस्त करने को कुछ गंभीर कदम भी उठा सकते हैं। 

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