अभी अभी: उत्तर कोरिया के खिलाफ अमेरिका ने उठाये कठोर कदम, रुस और चीन…

अमेरिका ने उत्तर कोरिया के शक्तिशाली परमाणु परीक्षण किए जाने के कारण उस पर ‘कठोरतम’ कदम उठाने की मांग की है, साथ ही चेतावनी दी कि प्योंगयांग के साथ बिजनेस करने वाला और उसके ‘खतरनाक’ परमाणु कार्यक्रम के इरादों में मदद करने वाला हर देश उसके रडार पर है.America against North Korea

संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में अमेरिकी राजदूत निक्की हेली ने उत्तर कोरिया पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की आपात बैठक में कहा, ‘‘इस समस्या को समाप्त करने के लिए सभी कूटनीतिक तरीकों को झोंक देने का समय आ गया है और इसका मतलब है कि यहां तुरंत कठोरतम संभव कदम उठाए जाएं.’’ निक्की ने कहा, ‘‘कठोरतम कदम ही हमें इस समस्या को कूटनीतिक तरीके से हल करने में सहायता करेगा.’’

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में निक्की ने कहा, ‘‘हमने शुरुआत की है और अभी लंबा सफर तय करना है.’’ उन्होंने कहा कि उत्तर कोरिया का परमाणु कार्यक्रम पहले के मुकाबले काफी आधुनिक और काफी खतरनाक है और अब तो यह देश हाइड्रोजन बम का परीक्षण कर लेने का दावा कर रहा है.

अमेरिकी राजनयिक ने कहा, ‘‘मुझे सुरक्षा परिषद के सदस्यों से कहना चाहिए ‘बहुत हो चुका’, सुरक्षा परिषद में आधे कदम उठाने का वक्त समाप्त हुआ…अब हमें जो भी कठोरतम कदम हैं, वे उठाने चाहिए.’’ निक्की ने उत्तर कोरिया के साथ व्यापार करने वाले देशों को भी चेतावनी दी.

उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका उत्तर कोरिया के साथ व्यापार करने वाले प्रत्येक देश को ऐसे देश के रूप में देखेगा जो उसके खतरनाम परमाणु इरादों को पूरा करने में उसकी मदद करता है.’’ अंडर सेक्रेटरी जनरल जेफरे फेल्टमैन ने बैठक में कहा कि (यूएन) महासचिव एंतोनियो गुतारेस चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र यूनिट एकजुट रहे और उचित कार्रवाई करे.

उन्होंने कहा, ‘‘हमने पिछले सप्ताह सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा था कि तनाव बढ़ने के साथ ही गलतफहमियां बढ़ने का भी खतरा बढ़ता है. ताजा घटनाक्रम को व्यापक प्रतिक्रिया की जरूरत है. इटली के राजनयिक ने इसे उत्तर कोरिया की भडकाऊ हरकत करार दिया और उत्तर कोरिया पर कडे प्रतिबंध लगाने की मांग की. फ्रांस और ब्रिटने के राजनयिकों ने भी ऐसे ही प्रस्ताव दिए.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने उत्तर कोरिया की ओर से किए गए छठे और सबसे शक्तिशाली परमाणु परीक्षण के बाद उस पर नए और कडे प्रतिबंध लगाने की मांग उठने के बाद यह आपात बैठक शुरू की. अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान और दक्षिण कोरिया ने उत्तर कोरिया के रविवार को हाइड्रोजन बम बनाने का दावा करने के बाद आपात बैठक बुलाने की मांग की थी.

संयुक्त राष्ट्र में चीन, रूस ने उत्तर कोरिया से बातचीत का अनुरोध किया

चीन ने उत्तर कोरिया के साथ संकट का समाधान करने के लिए राजनयिक बातचीत करने का अनुरोध किया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को चेताया कि वह कोरियाई प्रायद्वीप में अशांति और युद्ध की अनुमति नहीं देगा.

चीनी राजदूत लिउ जेइयी ने बताया, ‘‘जैसा हम बोल रहे हैं, एक एक चक्र में पड़ने के बाद प्रायद्वीप में स्थिति लगातार बिगड़ रही है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रायद्वीप के मुद्दे को शांतिपूर्वक हल किया जाना चाहिए. चीन प्रायद्वीप पर अराजकता और युद्ध की अनुमति कभी नहीं देगा.’’

रूस ने भी यही अपील की और कहा कि उत्तरी कोरिया के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों को लेकर पैदा हुए संकट का हल करने के लिए राजनयिक बातचीत ही एकमात्र तरीका है.

बहरहाल अमेरिका की राजदूत निक्की हेली ने प्रस्ताव को ‘अपमानजनक’ करार देते हुए खारिज कर दिया और कहा कि समय आ गया है कि उत्तर कोरिया के खिलाफ ‘कठोरतम कार्रवाई’ करते हुए उस पर दबाव बनाया जाए.

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