भारत में ही नहीं विदेशी जमीन पर भी जाकर लड़ेंगे: अजीत डोभाल

नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कहा है कि भारत ना केवल अपनी सीमा में लड़ेगा बल्कि विदेशी जमीन पर भी जाकर लड़ेगा, जहां से देश के लिए खतरा पैदा होता हो। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब भारत का चीन के साथ सीमा पर तनाव चरम पर है। यह भी माना जा रहा है कि डोभाल का यह बयान पाकिस्तान के संदर्भ में हो सकता है, जो अपनी जमीन पर आतंकवादियों ट्रेनिंग देकर भारत भेजता है। भारतीय सैनिक दो बार पीओके और बालाकोट में जाकर आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर चुके हैं।

ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन में डोभाल ने कहा कि भारत किसी पर पहला वार नहीं किया है, नई रणनीतिक सोच में यह शामिल है कि हम सुरक्षा खतरों को कम करने के लिए हम सक्रियता से कार्रवाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह जरूरी नहीं है कि हम वहीं लड़ें जहां तुम चाहो, भारत लड़ाई को वहां ले जाएगा जहां से खतरा पैदा होता है।

अजीत डोभाल

आधिकारिक सूत्रों ने इस बात पर जोर दिया कि डोभाल का संदर्भ सभ्यतागत नीति पर अधिक था। डोभाल ने कहा कि हम कभी भी अपने व्यक्तिगत हितों के लिए कभी आक्रामक नहीं होते हैं। हम निश्चित तौर पर अपनी जमीन के साथ विदेशी जमीन पर भी लड़ेंगे, लेकिन व्यक्तिगत हितों के लिए नहीं, परमार्थ आध्यात्मिकता के हित में। हमारा सभ्य राज्य किसी भी धर्म भाषा या संप्रदाय पर आधारित नहीं है, बल्कि इस राष्ट्र का आधार इसकी संस्कृति है।

डोभाल का यह बयान उसी दिन आया है जब एक तरफ आरएसएस चीफ मोहन भागवत ने चीनी अतिक्रमण को लेकर बात की तो रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने भी सख्त संदेश दिया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर तनाव को खत्म कर शांति बहाल करना चाहता है लेकिन भारतीय सैनिक देश की भूमि का एक इंच भी किसी को लेने नहीं देंगे। रक्षा मंत्री ने पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के सुकना में स्थित भारतीय सेना के 33 कोर के मुख्यालय में दशहरे के मौके पर शस्त्र पूजा के बाद यह टिप्पणी की।

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राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल शनिवार को उत्तराखंड में अपने पैतृक गांव घीड़ी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने यहां पर अपनी पत्नी के साथ कुलदेवी बाल कुंवारी की पूजा अर्चना की। साथ ही ग्रामीणों के साथ खुलकर गढ़वाली भाषा में भी बातचीत की। एनएसए बनने के बाद डोभाल तीसरी बार अपने गांव आए।

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