कृषि कानून रद्द, केंद्र ने लिखित में दी अपने “मन की बात”

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानूनों को रद्द किए जाने की मांग पर अड़े किसानों का आंदोलन बुधवार को 14वें दिन भी जारी है। सरकार लगातार किसानों के साथ बातचीत कर रही है। छह दौर की वार्ता के बाद, पहली बार सरकार ने कृषि कानूनों पर किसान संगठनों को लिखित प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव के जरिए से सरकार ने पहली बार अपने ‘मन की बात’ लिखित में किसानों को बताई है। यह प्रस्ताव 20 पन्नों का है। इसमें सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से लेकर पराली जलाने तक पर किसानों को आश्वासन दिया है। वहीं, किसानों की कानूनों को रद्द किए जाने की मांग पर सरकार ने उसे न मानने का संकेत दिया है। सरकार का कहना है कि वह इनमें संशोधन करने के लिए तैयार है। किसान नेताओं को भेजे प्रस्ताव में सरकार ने अन्नदाताओं के मुद्दों, वर्तमान में उसके कानून और सरकार के लिखित प्रस्ताव पर जानकारी दी है।

एमएसपी पर सरकार ने प्रस्ताव में कहा है कि वह इस संबंध में लिखित आश्वासन देने को तैयार है। पराली के मुद्दे पर सरकार ने किसानों की मांगों का समाधान करने का आश्वासन दिया है। सरकार ने प्रपोजल में लिखा है, ”पराली को जलाने से संबंधित प्रावधान एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ऑफ एनसीआर ऑर्डिनेंस, 2020 के अंतर्गत किसानों की आपत्तियों का समूचित समाधान किया जाएगा।” बता दें कि किसानों की मांग थी कि पराली से संबंधित इस कानून को सरकार रद्द करे।

क्या हैं किसानों के सभी मुद्दे और सरकार के प्रस्ताव?

मुद्दा 1- कृषि सुधार कानूनों को निरस्त करना

प्रस्ताव- कानून के वे प्रावधान जिन पर किसानों को आपत्ति है, उन पर सरकार खुले मन से विचार करने के लिए तैयार है।

मुद्दा 2- आशंका है कि मंडी समितियों द्वारा स्थापित मंडियां कमजोर होंगी और किसान प्राइवेट मंडियों के चंगुल में फंस जाएगा

प्रस्ताव- अधिनियम को संशोधित करके यह प्रावधानित किया जा सकता है कि राज्य सरकार निजी मंडियों के रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था लागू कर सके। साथ ही ऐसी मंडियों से राज्य सरकार एपीएमसी मंडियों में लागू सेस/शुल्क की दर तक सेस/शुल्क निर्धारित कर सकेगी।

मुद्दा 3- कारोबारी के रजिस्ट्रेशन को लेकर किसानों की आशंका

प्रस्ताव- राज्य सरकारों को इस प्रकार के रजिस्ट्रेशन के लिए नियम बनाने की शक्ति प्रदान की जा सकती है, जिससे स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार राज्य सरकारें किसानों के हित में नियम बना सकें।

मुद्दा 4- सिविल कोर्ट न जाने का विकल्प

प्रस्ताव- विवाद के निपटारे के लिए नए कानूनों में एसडीएम कोर्ट के अलावा, अतिरिक्त सिविल कोर्टमें जाने का विकल्प भी दिया जा सकता है।

मुद्दा 5- कृषि  अनुबंधों के पंजीकरण की व्यवस्था नहीं है

प्रस्ताव- जब तक राज्य सरकारें रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं बनाती हैं, तब तक सभी लिखित करारों की एक प्रतिलिपि करार पर हस्ताक्षर होने के 30 दिन के भीतर संबंधित एसडीएम कार्यालय में उपलब्ध कराने हेतु व्यवस्था की जाएगी।

मुद्दा 6- किसान की जमीन पर बड़े उद्योगपति कब्जा कर लेंगे।

प्रस्ताव- किसान की जमीन पर बनाई जाने वाली संरचना पर खरीदार द्वारा किसी प्रकार का कर्ज नहीं लिया जा सकेगा और न ही ऐसी संरचना उसके द्वारा बंधक रखी जा सकेगी।

मुद्दा 7- किसान की जमीन की कुर्की हो सकेगी

प्रस्ताव- प्रावधान स्पष्ट है, फिर भी किसी प्रकार के स्पष्टीकरण की जरूरत होगी तो उसे जारी किया जाएगा।

मुद्दा 8- किसान को एमसपी पर सरकारी एजेंसी को बेचने का विकल्प खत्म हो जाएगा।

प्रस्ताव- केंद्र सरकार एमएसपी की वर्तमान खरीदी व्यवस्था के संबंध में लिखित आश्वासन देगी।

मुद्दा 9- बिजली संशोधन विधेयक, 2020 को खत्म किया जाए

प्रस्ताव- किसानों की विद्युत बिल भुगतान की वर्तमान व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं होगा।

मुद्दा 10- एयर क्वालिटी मैनेजमेंट ऑफ एनसीआर ऑर्डिनेंस को खत्म किया जाए

प्रस्ताव- पराली जलाने से संबंधित प्रावधान के अंतर्गत किसानों की आपत्तियों का समाधान किया जाएगा।

सरकार का प्रस्ताव मिलने पर किसानों ने क्या कहा?

केंद्र सरकार का लिखित प्रस्ताव मिलने पर किसान नेताओं का कहना है कि वे पहले इसे पढ़ेंगे और अन्य किसानों के बीच में चर्चा करेंगे। इसके बाद, कोई भी फैसला लिया जाएगा। बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने कहा, ”किसान संघों ने विवादित कृषि कानूनों में संशोधन से संबंधित सरकार का मसौदा प्रस्ताव प्राप्त किया है।” वहीं, सिंघु बॉर्डर पर डटे किसान नेता कंवलप्रीत सिंह पन्नू ने कहा है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द किया जाना चाहिए। यह हमारी मांग है। प्रस्ताव में सिर्फ संशोधन की बात है तो फिर हम उसे खारिज कर देंगे।

गृह मंत्री अमित शाह ने खुद की थी किसान नेताओं से बात

कृषि मंत्री और अन्य मंत्रियों के साथ किसानों की बातचीत के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को खुद मोर्चा संभाला था। उन्होंने देर रात तक 13 किसान नेताओं के साथ बैठक की थी। इस बैठक के बाद किसान नेता ने कहा था कि सरकार ने कानून वापस लेने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना था कि वह किसानों द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण मुद्दों पर एक मसौदा प्रस्ताव भेजेगी। वहीं, सरकार और कृषि संगठन के नेताओं के बीच एक और दौर की वार्ता बुधवार की सुबह भी प्रस्तावित थी, जिसे रद्द कर दिया गया।

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