जन्म के 7 साल बाद इस बच्चे ने पहली बार अपनी आँखों से देखी दुनिया, मिला था…

जीवन में आंखों की अहमियत क्या होती है, यह उस बालिका से अधिक कौन जान सकता है, जिसने जन्म के 7 साल बाद दुनिया देखी हो। ऐसी ही कुछ कहानी है सेंधवा विकासखंड के ग्राम झापड़ीपाड़ला निवासी 7 वर्षीय रेखा पिता लालसिंह की।
बालिका को जन्म से आंखों में मोतियाबिंद था। ऑपरेशन में आ रहे अधिक खर्च के चलते परिजन हार कर मायूस हो चुके थे। फिर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम ने परिजनों को असंभव से लगने वाले इस कार्य को पूर्ण कराया और आज रेखा दुनिया देखने लगी है।
जानकारी अनुसार लालसिंह और फुंदलीबाई के घर 7 साल पहले बालिका रेखा का जन्म हुआ। डॉक्टरों को दिखाने पर परिजनों को ज्ञात हुआ कि बच्ची जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित है। पालक तीन बार बच्ची को इंदौर ले गए लेकिन प्रायवेट अस्पताल में ऑपरेशन पर होने वाले भारी व्यय के चलते हर बार मायूस होकर लौट आए और अपनी नियति मानकर दूसरे कार्यों में लग गए।
नि:शुल्क हुआ ऑपरेशन
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम के सदस्य डॉ. गोपाल अग्रवाल, एएनएम नजमा बानों व नेत्र सहायक बीएस भाटिया ने जांच कर रेखा के परिजनों को बताया कि बालिका के आंखों की रोशनी अभी भी आ सकती है और होने वाला ऑपरेशन राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पूरी तरह नि:शुल्क होगा।
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गत दिनों रेखा को इंदौर के चोइथराम अस्पताल ले जाया गया। वहां उसकी एक आंख का नि:शुल्क ऑपरेशन हुआ। इसके बाद अब रेखा को एक आंख से दिखाई देने लगा है। अब रेखा दूसरे बच्चों के साथ खेलने लगी है, वहीं आंगनवाड़ी में जाकर स्कूल पूर्व की बातें देखकर सीखने लगी है।
16 दिसंबर तक होगा सर्वे
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला समन्वयक राधेश्याम जमरे ने बताया कि योजना के तहत 30 चयनित बीमारियों में 18 वर्ष तक के बच्चों का नि:शुल्क इलाज करवाया जाता है। अब तक जिले में योजना के तहत 107 कटे-फटे ओंठ वाले बच्चों का, 2 मोतियाबिंद से पीड़ित बच्चों का व 11 श्रवण बाधित बच्चों का इलाज करवाया गया है। जिले में 16 दिसंबर तक पुन: सर्वे कर उपयुक्त बच्चों के चयन की कार्रवाई प्रारंभ की गई है।





