चाणक्य नीति के अनुसार, इन 6 चीजों पर कभी ना करें अहंकार

भारत के प्रमुख विद्वानों में गिने जाने वाले आचार्य चाणक्य की नीतियां व्यक्ति को भविष्य में सफल होने और निराशा से पार पाने का रास्ता दिखाती है. यही कारण है कि चाणक्य की नीतियों को आज भी काफी महत्व दिया जाता है. अपने चाणक्य नीति में श्लोक के माध्यम से आचार्य बताते हैं कि मनुष्य को किन 6 चीजों को लेकर व्यक्ति को कभी अहंकार नहीं करना चाहिए.

दाने तपसि शौर्यं वा विज्ञाने विनये नये ।
विस्मयो न हि कर्तव्यो बहुरत्ना वसुन्धरा ।।

इस श्लोक में चाणक्य कहते हैं कि जब मनुष्य…

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दान

तप

शूरता

विद्वता

सुशीलता

और नीति निपुणता की बात करे तो उसे इन चीजों को लेकर अभिमान या अहंकार नहीं होना चाहिए.

चाणक्य कहते हैं कि मानव-मात्र में कभी भी अहंकार की भावना नहीं रहनी चाहिए. क्योंकि इस धरती पर एक से बढ़कर एक दानी, तपस्वी, शूरवीर, विद्वान और नीति निपुण व्यक्ति मौजूद हैं.

त्यज दुर्जनसंसर्ग भज साधुसमागमम् ।
कुरु पुण्यमहोरात्रं स्मर नित्यमनित्यतः।।

चाणक्य इस श्लोक में कहते हैं कि दुष्टों का साथ छोड़ दो, सज्जनों का साथ करो, रात-दिन अच्छे काम करो और सदा ईश्वर को याद करो. यही मानव का धर्म है. आशय यह है कि हमेशा व्यक्ति को सज्जन लोगों के साथ रहना चाहिए और दुष्ट प्रवृति के लोगों से दूर रहना चाहिए.

सज्जन लोगों का विकार भी लाभदायक होता है और दुर्जनों से होने वाला लाभ दुखदायक ही होता है. साथ ही व्यक्ति को हमेशा पुण्य और अच्छे काम को करने के बारे में सोचना चाहिए. ऐसा करने वाला मनुष्य हमेशा खुशी से रह पाता है.

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