लखनऊ के डालीगंज में छेड़छाड़ के विरोध पर एसी मैकेनिक हुई हत्या…

लखनऊ के हसनगंज की डालीगंज क्रॉसिंग पर गुरुवार रात आपसी झगड़े के बाद एसी मैकेनिक कीर्तन रावत (20) की सिर पर डंडा मारकर हत्या कर दी गई। परिवारीजनों और इलाकाई लोगों का कहना है कि आरोपी फजल उर्फ कट्टा ने कीर्तन के परिवार की एक सदस्य से छेड़छाड़ की थी।

वह विरोध करने गया तो फजल ने उसके सिर पर डंडा मार दिया। उधर, हसनगंज पुलिस का कहना है कि कीर्तन डालीगंज क्रॉसिंग पर गुटखा खरीदने गया था जहां उसका फजल से किसी बात को लेकर झगड़ा हुआ। मारपीट में उसकी मौत हो गई।

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पुलिस का कहना है कि कीर्तन की मां सावित्री ने भी आपसी झगड़े की बात लिखकर दी है। फिलहाल पुलिस की टीमें आरोपी फजल की तलाश में लगी हैं। कीर्तन निरालानगर की सीएसआर कॉलोनी झोपड़पट्टी में रहता था। उसके पिता रामगोपाल की दो साल पहले बीमारी से मौत हो चुकी है।

घर पर मां सावित्री के अलावा चार भाई-बहन हैं। बृहस्पतिवार रात करीब साढ़े नौ बजे वह अपने भाई रोहित के साथ डालीगंज क्रॉसिंग के नीचे स्थित पान की गुमटी में गुटखा लेने गया था। वहां खदरा निवासी फजल उर्फ कट्टा से किसी बात को लेकर रोहित का विवाद हो गया। दोनों में मारपीट होने लगी तो कीर्तन ने बीच-बचाव किया।

इस दौरान फजल ने कीर्तन के सिर पर डंडे से वार कर दिया। उसका सिर फट गया और खून से लथपथ अवस्था में वह जमीन पर गिर पड़ा। मौके पर चीखपुकार मच गई। कीर्तन को अस्पताल ले जाया गया। शुक्रवार दोपहर उसने दम तोड़ दिया।

इस बीच छेड़छाड़ का विरोध करने पर हत्या की खबर फैलने से पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सावित्री की तरफ से फजल के खिलाफ केस दर्ज करके उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस ने मौके पर मौजूद कई लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।

छेड़छाड़ को लेकर इलाके में अलग-अलग तरह की बातें हो रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि फजल ने एक महीने पहले कीर्तन के परिवार की सदस्य से अभद्रता व छेड़छाड़ की थी जबकि कुछ लोग बृहस्पतिवार शाम छेड़छाड़ की बात कह रहे हैं। पुलिस ने बताया कि कीर्तन होली के एक दिन पहले गोंडा के कर्नलगंज निवासी मौसी के घर पर गया था। वह बृहस्पतिवार को ही लखनऊ लौटा था और यह घटना हो गई।

कीर्तन घर का एकलौता ऐसा कमाऊ सदस्य था। सावित्री ने बताया कि पति की मौत के बाद उन्हें दूसरों के घरों का कामकाज करना पड़ा। जबसे कीर्तन ने एसी का काम शुरू किया तो परिवार की स्थिति सुधरना शुरू हुई। भाई-बहनों की पढ़ाई लिखाई होने लगी। दो बहनों की शादी का जिम्मा भी उसके ही कंधे पर था लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। सावित्री और कीर्तन के भाई-बहन सदमे में हैं।

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