चालू खरीफ सीजन में रिकार्ड 7.42 करोड़ टन सरकारी धान खरीद होने का अनुमान

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में एक महीने के भीतर ही धान की सरकारी खरीद दो करोड़ टन के नजदीक पहुंच गई है। केंद्रीय उपभोक्ता मामले व खाद्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि इस बार रिकार्ड 7.42 करोड़ टन धान की खरीद होने का अनुमान है। यह पिछले सीजन के मुकाबले 18 फीसद अधिक है। पिछले एक महीने के भीतर 1.88 करोड़ टन धान की सरकारी खरीद हो चुकी है, जो पिछले सीजन के 1.51 करोड़ टन के मुकाबले 24 फीसद ज्यादा है।

नवनियुक्त उपभोक्ता मामले व खाद्य मंत्री गोयल ने कहा कि सरकार की मंशा किसानों की उपज की ज्यादा से ज्यादा खरीद करनी है। इसीलिए चालू खरीफ सीजन के लिए अब तक के सर्वाधिक 39000 से भी ज्यादा खरीद केंद्र स्थापित किए गए हैं। धान की खरीद उत्तर से दक्षिण सभी धान उत्पादक राज्यों में की जा रही है।

पंजाब में अब तक 1.30 करोड़ टन धान की खरीद हो चुकी है जो पिछले सीजन के 95 लाख टन के मुकाबले 37 फीसद ज्यादा है। उत्तर प्रदेश में पिछले साल के 76 हजार टन के मुकाबले चालू सीजन में 3.90 लाख टन धान खरीदा जा चुका है। तमिलनाडु में यह 34 हजार टन के मुकाबले 3.56 लाख टन पहुंच गया है।

पंजाब में तेज खरीद के बाद अब उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु व बिहार समेत अन्य राज्यों में धान खरीद की रफ्तार तेज होगी। राज्यों की मांग के अनुसार केंद्रीय एजेंसियां धान खरीद का बंदोबस्त और निगरानी करेंगी। बिहार में विधानसभा चुनाव प्रचार चरम पर है। खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने बताया कि बिहार में स्थापित खरीद केंद्रों पर धान की आवक 15 नवंबर से शुरु होती है। इसके लिए तैयारियां कर ली गई हैं।

किसानों की आमदनी बढ़ाने की बात करते हुए गोयल ने कहा कि सरकार ने जहां न्यूनतम समर्थन मूल्य में उल्लेखनीय वृद्धि की है, वहीं ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका लाभ देने का प्रयास कर रही है। वर्ष 2015-16 में जहां 73 लाख किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ मिला था, वहीं चालू सीजन 2020-21 में किसानों की संख्या 1.57 करोड़ हो जाएगी।

पंजाब में धान की तेज खरीद के सवाल पर खाद्य मंत्री गोयल ने कहा कि वहां के कुछ लोग बिचौलियों के हितों की रक्षा को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। जबकि किसान अपनी उपज को सरकारी खरीद केंद्रों पर बेचने में लगे हैं। पंजाब की सत्तारुढ़ सरकार पर भी गोयल ने हमला बोला। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में केंद्रीय कानूनों के खिलाफ वहां के राजनीतिक दल भी रोटियां सेंक रहे हैं।

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