बिल्डिंग को ही बना लिया नशे का अड्डा, नशा मुक्ति का नाम

जबलपुर. जिला चिकित्सालय विक्टोरिया में नशा मुक्ति केन्द्र है और यहां दवाइयां लेने के बहाने अनेक ऐसे नशेड़ी आते हैं जो नशा से तौबा नहीं करना बल्कि वो नए नशेड़ी दोस्त खोजने आते हैं और फिर इसके बाद शुरू होता है चोरी-चकारी का दौर। इसके बाद स्मैक या अन्य नशीले पदार्थ न मिलने पर वे एविल का इंजेक्शन खरीद लेते हैं और अपनी नसों में भरकर मस्ती करते हैं। अस्पताल प्रबंधन भी इन नशेड़ियों से परेशान हो चुका है क्योंकि ये परिसर की सामग्री चुरा लेते हैं।
बिल्डिंग को ही बना लिया नशे का अड्डा, नशा मुक्ति का नाम
जिला अस्पताल विक्टोरिया में टीबी की बीमारी की रोकथाम और उपचार के लिए टीबी ओपीडी बनी थी। उसे तोड़कर वहां नई बिल्डिंग बनाई जा रही है। ढांचा लगभग तैयार है खिड़की, दरवाजे आदि अभी नहीं लगे हैं। पास में ही नशा मुक्ति केन्द्र है और यहां रोजाना अनेक नशेड़ी आते हैं। कुछ तो ईमानदारी से दवा आदि लेकर परिजनों के साथ ही घरों को रवाना हो जाते हैं पर कई यहां नए दोस्त खोजने आते हैं और फिर एकत्र होकर इसी नई बिल्डिंग में पहुंच जाते हैं। वहां कुछ के पास स्मैक आदि होती है जिसका नशा वे मिलकर करते हैं, जबकि जिसे स्मैक या अन्य कोई नशीला पदार्थ नहीं मिलता वह फेनिरमाइन मालेट एविल इंजेक्शन खरीद कर नशा करते हैं। यहां एविल इंजेक्शन की हजारों खाली बोतलें पड़ी हैं साथ ही इंजेक्शन भी पड़े हैं।

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स्मैक बेचने वाले भी सक्रिय हैं
बताया जाता है कि नशा मुक्ति केन्द्र के आसपास स्मैक बेचने वाले भी सक्रिय रहते हैं। जो मरीज नशे के एडिक्शन से बाहर आना भी चाहते हैं उन्हें ये नशे के सौदागर फिर से नशे की गिरफ्त में डाल देते हैं। बताया तो यहां तक जाता है कि दो लड़कियां भी रोजाना यहां डेरा डाले रहती हैं, इनके संबंध नशे के सौदागरों से हैं और ये लड़कियां आसानी से स्मैक आदि बेच देती हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इसकी सूचना पुलिस को भी दी पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है।
 
अस्पताल से एसी का आउटर चुरा ले गए
नशेड़ियों को जब नशा करने की धुन सवार होती है तो वे कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं। पिछले दिनों जिला अस्पताल से एसी का आउटर ही चोरी हो गया। नशेड़ी अस्पताल परिसर में रखी ऐसी कोई भी सामग्री नहीं छोड़ते जो बाजार में आसानी से बेची जा सके। इससे जो भी रुपए मिलते हैं वे नशा करने लगते हैं।
 
दिन के अलावा रात में भी रहता है डेरा
यहां दोपहर के वक्त तो नशेड़ी अक्सर ही नजर आ जाते हैं रात में भी कई नशेड़ी इस खाली इमारत का लाभ लेते हैं। चौकीदार या अन्य किसी की हिम्मत नहीं होती कि वे इन्हें खदेड़ दें क्योंकि नशा करने के बाद वे उग्र हो जाते हैं और हमला करने से भी नहीं चूकते हैं। इस प्रकार नशा रोकने के लिए बनाया गया केन्द्र नशेड़ियों के लिए सुविधा का केन्द्र बनता जा रहा है। पुलिस यहां लगातार गश्त करे तो नशे की गिरफ्त में जीवन बर्बाद कर रहे युवाओं को नई दिशा में लाया जा सकता है।
 
खांसी सिरप के बाद अब एंटी एलर्जिक दवा
चिकित्सक बताते हैं कि नशेड़ियों को जब स्मैक और अन्य नशीले पदार्थ नहीं मिलते तो पहले वे खांसी के सिरप का सहारा लेते हैं बेनाड्रिल और फेंसीड्रिल का नम्बर पहले स्थान पर है पर अब एंटी एलर्जिक दवा एविल के इंजेक्शन का उपयोग भी होने लगा है। फेंसीड्रिल को तो बांग्लादेश भी भेजा जाता है और बॉर्डर पर इसे कई बार पकड़ा जा चुका है।
एक ही जगह एकत्र हो जाते हैं
शहर के अलग-अलग क्षेत्रों के नशेड़ी एक ही जगह एकत्र हो जाते हैं और फिर नशा करने का इंतजाम करते हैं। हमने कई बार प्रयास किए पर इन्हें समझाया नहीं जा सका। अक्सर ये अस्पताल की सामग्री भी चुरा लेते हैं। 
डॉ. एके सिन्हा, सिविल सर्जन जिला अस्पताल
 
कई नशेड़ी यूज करते हैं
एविल एंटी एलर्जिक इंजेक्शन है और अक्सर ही यह सुना है कि कई नशेड़ी इसको इंजेक्ट करके नशा करते हैं। चूंकि यह आसानी से मिल जाता है इसलिए स्मैक आदि न मिलने पर वे इसका ही नशा कर लेते हैं। इससे नींद आती है और उन्हें लगता है नशा हो गया। 
डॉ. केसी देवानी, वरिष्ठ चिकित्सक
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