Mothers day special:माँ की ममता के मायने,खुद मां बनने के बाद

पांच मशहूर मॉम्स बता रही हैं कि खुद मां बनने के बाद अपनी मां की वो कौन-सी बातें हैं जिनकी वे कदर करने लगी हैं।
मेरी मां की कुछ ऐसी बातें थीं जिन्हें मेरा बेटा के होने के बाद से मैं पसंद करने लगी थी। हाथ से बाहर निकल जाने वाली स्थितियों में भी मेरी मां का पेशेंस नहीं खत्म होता था। मैंने अपने बेटे के भविष्य के लिए पैसे बचाने शुरू किए ठीक वैसे ही जैसे उन्होंने मेरे लिए किये थे। मुझे यह भी अहसास हुआ की पहले से हर चीज का इंतज़ाम करना और चीजें ऑर्गनाइज्ड बनाए रखना उनके लिए कितना मुश्किल होता होगा, जैसा कि आज मेरे लिए होता है।
मुझे इस बात का अहसास हुआ कि कैसे आप किसी के लिए खुद से ज्यादा चिंता करने लग जाते हैं, खुद से ज्यादा देखभाल करने लग जाते हैं। खुद मां बनने से पहले मैं कभी नहीं सोचती थी कि कैसे मेरी मां ने अलग-अलग स्थितियों में रिऐक्ट किया होगा। मैं हमेशा अपनी लाइफ को अपने नजरिए से देखा करती थी। मुझे ये कभी समझ नहीं आता था कि मेरी मां मेरी लाइफ के बारे में क्या और कैसा सोचती होगी! अब जाकर मुझे समझ में आया है वो प्यार और वो चिंता अपने बच्चों के लिए जो उन्हें होती होगी क्योंकि आज मैं भी अपने बच्चों के लिए वही महसूस करती हूं।
मेरी मां हमेशा से ऐसी रही हैं कि वो खुद से पहले दूसरे के बारे में सोचती हैं, खासकर मेरे। इकलौती संतान होने की वजह से हमेशा सच बोलना सीखा। आज भी ऐसा ही करती हूं। आज मां बनने के बाद मैं समझ सकती हूं कि खुद की जरूरतों को बाद में रखने का मतलब क्या होता है। अपना करियर बैलेंस करना, हॉबीज, लाइफ, आपकी और साथ ही आपके बच्चे की जरूरतें पूरी करना।
साथ ही बच्चों का स्कूल होमवर्क, उनके इंटरेस्ट का ध्यान रखना और फिर सभी चीजों की प्राथमिकता तय करना। कभी ये बेहद मुश्किल भी लगता है और ऐसा लगता है कि आपको पेशेंस के पूल में डुबकी मारनी होगी। मां ये सब कितनी आसानी से कर लिया करती थीं और आज भी मेरी बेटी मीरा के साथ वो यही करती हैं। ये सब वो बेहद निस्वार्थ भाव, शांति और प्यार के साथ करती हैं। उनकी कोई उम्मीदें भी नहीं होती हैं। मैं उनकी तरह तो नहीं बन सकती, हमेशा खुद को दूसरे नंबर पर ही रखूंगी। उनको मैच करना मेरे लिए आसान नहीं होगा।
जब भी मेरी मां मुझे कुछ सलाह देती थी तो मैं सोचा करती थी कि ये क्यों मुझे हर वक्त लेक्चर देती रहती हैं ? आज जब चिंता करते हुए कुछ ऐसी बातें हैं जो मैं अपने बेटे को बताना चाहती हूं तो वो भी वैसे ही रिएक्ट करता है जैसे मैं किया करती थी। मां को हमेशा अपने बच्चे सबसे बेहतर लगते हैं। जब मेरी मां मुझे मेरे दोस्त की शादी में गाने के लिए कहा करती थी जिससे लोग मेरा टैलेंट देख सकें तो मैं उनसे बहस करने लगती थी।
उन्होंने मेरी काबलियत को सबसे पहले पहचान लिया था। ठीक ऐसे ही मुझे भी यही लगता रहता था कि मेरा बेटा स्टार है जबकि वो केवल एक साल का ही था। वो अपनी फीडिंग बॉटल मुंह में लेकर हमिंग साउंड निकालता था। तब मुझे अहसास हुआ क्यों मेरी मां चाहती थीं कि मैं सबसे अच्छा करूं और हमेशा एनकरेज करती रहती थीं मुझे।
SANJANA KAPOOR (THEATRE PERSON)
मैंने हमेशा इसे सराहा है लेकिन इस बात का भरोसा पक्का तब हुआ जब 13 साल पहले बेटा पैदा हुआ। सेन्स ऑफ ट्रस्ट और इंडिपेंडेंस मुझमें मेरी मां ने पैदा किया। भरोसा इस बात का कि मैं अपना ख्याल खुद रख सकती हूं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट में खुद ट्रैवल कर सकती हूं, अपने को-एक्टर का ग्रीक स्टाइल में हेयरस्टाइल बना सकती हूं जो वो मुझे अपने स्कूल के एन्युअल प्ले में करने के लिए कहा करती थीं।
स्कूल के प्ले में अपने आप डायरेक्ट भी कर सकती हूं इस बात का भरोसा भी दिया। आसपास मिस-बिहेव करने वाले पुरुषों से खुद को कैसे महफूज रखना है यह भी उन्होंने सिखाया। मुझे दुनिया की खूबसूरती के बारे में पता था लेकिन दुनिया का बदसूरत चेहरा मैंने बहुत बाद में जाना।









