पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने चीन के साथ सीमा विवाद पर तोड़ी चुप्पी

 पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने अपने अप्रकाशित संस्मरण ”फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” से जुड़े राजनीतिक विवाद पर चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने 2020 के भारत-चीन सीमा विवाद पर अपने रुख का दृढ़ता से बचाव किया है।

एक विशेष साक्षात्कार में, जनरल नरवणे ने अपने इस कथन को दोहराया कि चीन के हाथों हमने एक इंच भी जमीन नहीं खोई है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेतृत्व सैन्य मामलों में सीधे हस्तक्षेप नहीं करता और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े निर्णय सुरक्षा संबंधी कैबिनेट समिति (सीसीएस) द्वारा लिए जाते हैं।

सशस्त्र बलों को यथासंभव राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। किसी विशेष बयान को प्रधानमंत्री से जोड़ना उचित नहीं है। विवाद के केंद्र में जनरल नरवणे का यह दावा है कि 2020 के पूर्वी लद्दाख गतिरोध के दौरान भारत ने चीन के हाथों अपना कोई क्षेत्र नहीं गंवाया।

कांग्रेस नेताओं ने बार-बार इस दावे को चुनौती दी है और उनके संस्मरण के अंशों का हवाला दिया है, जिनके अनुसार पूर्व सेना प्रमुख एक अलग ही कहानी बयां करते हैं। हालांकि, पूर्व सेना प्रमुख ने इसको लेकर स्पष्ट रुख अपनाया।

उन्होंने कहा-उस समय भी मैंने कहा था कि हमने कोई क्षेत्र नहीं गंवाया है। मैं आज भी उस बयान पर कायम हूं। अगर कोई इसे मानना नहीं चाहता, तो यह उसकी मर्जी है।

जनरल नरवणे ने कहा कि सुरक्षा से जुड़े सभी निर्णय सीसीएस द्वारा लिए जाते हैं। इस समिति की अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं। सेना में जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वे हमेशा सेना प्रमुख के आदेश पर होते हैं। लेकिन आप बार-बार यह नहीं कह सकते कि सेना प्रमुख ने ये कहा है, इसलिए ऐसा करो।

उल्लेखनीय है कि जनरल नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण को लेकर राजनीतिक विवाद तब खड़ा हो गया, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने संसद के बजट सत्र के दौरान अपने भाषण में इसकी कुछ पंक्तियों का उल्लेख करने की कोशिश की।

लोकसभा में विपक्ष के नेता ने पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ 2020 के सीमा विवाद को लेकर सरकार पर निशाना साधा। दूसरी तरफ भाजपा ने कांग्रेस नेता द्वारा अप्रकाशित पुस्तक का हवाला देने का कड़ा विरोध किया।

पुस्तक के प्रकाशक ने बाद में स्पष्ट किया कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ बिक्री के लिए उपलब्ध नहीं थी। जनरल नरवणे की एक नई पुस्तक इसी महीने प्रकाशित हुई है, जिसका शीर्षक है-द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज।

यह पुस्तक भारतीय सशस्त्र बलों को लेकर किंवदंतियों और अनकही कहानियों की पड़ताल करती है, जिसमें राजनीतिक विवादों के बजाय मिथकों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

आईएएनएस के अनुसार, जनरल नरवणे ने कहा कि 2020 में पूर्वी लद्दाख में चीन की सेना के साथ गतिरोध के दौरान सरकार और देश पूरी तरह से सेना के साथ खड़ा था। उन्होंने उन चर्चाओं को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया है कि गतिरोध के दौरान सेना को सरकार ने बिना किसी निर्देश के अकेला छोड़ दिया था।

एक समाचार चैनल के साथ इंटरव्यू में जनरल नरवणे ने कहा कि चीनी सेना के साथ आमना-सामना होने की स्थिति में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से स्पष्ट निर्देश था कि वहां भारतीय सेना को जो सही लगे-वह करे। यह निर्देश सेना के प्रति सरकार के विश्वास का परिचायक है।

सरकार ने कार्रवाई के लिए निर्णय लेने की सेना को पूर्ण स्वतंत्रता दी थी। ऐसा इसलिए भी संभव हुआ, क्योंकि सरकार का मानना था कि सीमा की स्थितियों को सेना बेहतर ढंग से समझती है।

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