कठुआ: सरथल में विकसित हो रहा 110 कनाल का आलू बीज फार्म

कठुआ के सरथल में 110 कनाल में आलू बीज फार्म विकसित किया जा रहा है, जहां उच्च गुणवत्ता वाले कुफरी बादशाह आलू का बीज तैयार किया जाएगा। यह परियोजना कृषि के साथ-साथ कृषि-पर्यटन को भी बढ़ावा देगी और किसानों व पर्यटकों दोनों के लिए नया आकर्षण बनेगी।
कठुआ जिले का पहाड़ी क्षेत्र सरथल कृषि-पर्यटन में नया अध्याय लिखने जा रहा है। बनी-भद्रवाह मार्ग से सटी सरथल की वादी में कृषि विभाग 110 कनाल में आलू बीज फार्म तैयार कर रहा है। सर्दी में बर्फ से लकदक रहने वाले इस क्षेत्र में मौसम खुलने के साथ ही काम ने रफ्तार पकड़ ली है।
इमारतों का काम इसी साल पूरा होने की उम्मीद है। जानकारी के अनुसार सरथल में कुफरी बादशाह किस्म के आलू का बीच तैयार किया जाएगा। खास बात यह है कि संभाग के पहाड़ी इलाकों के आलू की अच्छी खासी मांग व बाजार के बीच किसानों को अच्छी किस्म के बीज मुहैया करवाने का सरथल संभाग का सबसे बड़ा केंद्र बन जाएगा।
सरथल और भद्रवाह का रुख करने वाले पर्यटक यहां आलू बीज फार्म को करीब से देखने-समझने के अलावा फार्म के पास विकसित ओपन कैफे का भी लुत्फ ले सकेंगे। तैयार हो रही इमारताें में प्रबंधक के कार्यालय, चौकीदार के कमरे और फार्म हाउस का काम तेजी से जारी है।
फिलहाल जमीन के दो हिस्सों को बांटकर बीचोंबीच बहते सरथल नाले पर पुल, ओपन कैफे हाउस और एक एकड़ में आलू की लाइव डिमांस्ट्रेशन का काम किया जाना बाकी है। इसी चरण में वाहन पार्किंग की सुविधा भी तैयार की जाएगी। कृषि विभाग ने एक एकड़ के सरकारी फार्म को तैयार करने के अलावा सरथल को भी आलू गांव के रूप में विकसित करने का काम तेज कर दिया है।
प्रदेश में सबसे बड़ा आलू फार्म नत्थाटॉप में लेकिन बीमार
जम्मू-कश्मीर में खराब मौसम और नीमाटोड बीमारी से आलू का बीज तैयार करने में चुनौतियां पेश आ रही हैं। सरथल फार्म से बड़ी राहत मिल सकती है। प्रदेश में सबसे बड़ा आलू बीज फार्म नत्थाटॉप के पास है। रामबन में भी दो छोटे फार्म हैं। 70 के दशक में नत्थाटॉप में बनाए गए फार्म से तैयार होने वाले आलू के बीज की पूरे प्रदेश में आपूर्ति होती थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों से नीमाटोड बीमारी से उत्पादन लगातार गिरता जा रहा है। बनी तहसील के सरथल इलाके की समुद्रतल से ऊंचाई 2500 मीटर है।
इस क्षेत्र में किसी तरह की बीमारी भी नहीं है। ऐसे वातावरण में आलू की अच्छी किस्म का सर्वश्रेष्ठ बीज तैयार करना आसान होगा। एक तरफ सरकारी फार्म पर बीज तैयार होगा वहीं आसपास के किसानों को भी इससे बड़े स्तर पर लाभ मिलेगा। नत्थाटॉप में आलू फार्म जिस जगह पर है वहां पर धुंध रहती है। तेज हवा का भी असर रहता है। इसे विंडवर्ड साइड कहा जाता है। फसल पर फूल खिलने के दौरान मौसम की ऐसी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं। हिमाचल में कुफरी की साइट लीवर्ड साइड पर है जहां धूप खिली रहती है और तेज हवाओं के साथ धुंध का असर नहीं रहता। बीज की खेती के लिए यह सबसे अनुकूल होता है। सरथल की भौगोलिक परिस्थितियां भी लीवर्ड साइड हैं।
सरथल में 110 कनाल पर आलू फार्म को तैयार किया जा रहा है। दस करोड़ की परियोजना तीन हिस्सों में है जिसमें ढांचे का काम जारी है। मिट्टी तैयार करने का काम और मशीनरी और उपकरण खरीदने का काम किया जाना है। परियोजना में अब तक 2.88 करोड़ और 95 लाख की राशि हासिल हुई है जिससे काम करवाया गया है। सरकार एकमुश्त शेष राशि जारी करती है तो इसी वित्तीय वर्ष में परियोजना को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। -जितेंद्र कुमार खजूरिया, मुख्य कृषि अधिकारी, कठुआ





