गंगा सप्तमी 2026: ‘मां गंगे’ की एक आरती मिटा सकती है जीवन के सारे पाप

हिंदू धर्म में गंगा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और ‘मां’ का स्वरूप हैं। यूं तो हर दिन गंगा स्नान का महत्व है, लेकिन गंगा सप्तमी (Ganga Saptami 2026) का दिन बेहद खास माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को ही गंगा जी का पुनर्जन्म हुआ था, इसलिए इसे ‘गंगा जयंती’ के रूप में भी मनाया जाता है।
क्यों कहा जाता है इसे मां गंगा का ‘पुनर्जन्म’?
पौराणिक कथाओं (जैसे पद्म पुराण) में उल्लेख मिलता है कि जब मां गंगा धरती पर उतरीं, तो उनके वेग से ऋषि जह्नु की कुटिया बह गई। इससे क्रोधित होकर ऋषि ने पूरी गंगा को पी लिया था। बाद में देवताओं के आग्रह पर उन्होंने अपने कान से गंगा को दोबारा मुक्त किया और पुनर्जन्म दिया। यही कारण है कि इन्हें ‘जाह्नवी’ भी कहा जाता है और इस दिन को उनके पुनर्जन्म का दिन माना जाता है।
आइए जानते हैं साल 2026 में गंगा सप्तमी क्यों खास है और इस दिन मां गंगा की आरती करने से जीवन में क्या बदलाव आ सकते हैं।
॥ श्री गंगा मैया आरती ॥
नमामि गंगे ! तव पाद पंकजम्,
सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम् ।
भक्तिम् मुक्तिं च ददासि नित्यं,
भावानुसारेण सदा नराणाम् ॥
हर हर गंगे, जय माँ गंगे,
हर हर गंगे, जय माँ गंगे ॥
ॐ जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता,
मनवांछित फल पाता ॥
चंद्र सी जोत तुम्हारी,
जल निर्मल आता ।
शरण पडें जो तेरी,
सो नर तर जाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
पुत्र सगर के तारे,
सब जग को ज्ञाता ।
कृपा दृष्टि तुम्हारी,
त्रिभुवन सुख दाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
एक ही बार जो तेरी,
शारणागति आता ।
यम की त्रास मिटा कर,
परमगति पाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
आरती मात तुम्हारी,
जो जन नित्य गाता ।
दास वही सहज में,
मुक्त्ति को पाता ॥
॥ ॐ जय गंगे माता..॥
ॐ जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता ।
जो नर तुमको ध्याता,
मनवांछित फल पाता ॥
ॐ जय गंगे माता,
श्री जय गंगे माता।





