अमरनाथ यात्रा से पहले बड़ी तैयारी: जम्मू-श्रीनगर के बीच तैयार होगी फोरलेन टनल

जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के हालात अमरनाथ यात्रा से पहले सुधरने की उम्मीद है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने रामबन-बनिहाल के बीच भूस्खलन का तोड़ टनल के तौर पर निकाला है। टनल का काम 24 घंटे चल रहा है।

एनएचएआई ने निर्माण के लिए मई तक की समयसीमा तय की है। टनल फोरलेन होगी और निर्माण के बाद जम्मू-श्रीनगर के बीच आवाजाही आसान होगी। मौजूदा समय में भूस्खलन का शिकार हो रहे खूनी नाला समेत दूसरे ब्लैक स्पाॅट से निजात मिल जाएगी। अमरनाथ यात्रा के दौरान जाम लगने या हादसे की आशंका भी कम होगी।

नेशनल हाईवे-44 पर रामबन-बनिहाल के बीच डिगडोल-पंथ्याल के बीच सुरंग का निर्माण किया जा रहा है। इसकी लंबाई उत्तर दिशा से 2600 मीटर है। इसे टि्वन ट्यूब के तौर पर बनाया जा रहा है। दक्षिण दिशा से टनल की कुल लंबाई 3.08 किलोमीटर है। टनल के दोनों ओर से 87 फीसदी निर्माण पूरा हो चुका है। सुरंग के दोनों तरफ से वाहनों की आवाजाही को सकेगी। सुरंग निर्माण पर 866.37 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

इसके निर्माण के बाद अमरनाथ यात्रा के साथ ही सेब सीजन और पर्यटन कारोबार में तेजी आएगी। अब तक इस हिस्से में बीते कुछ वर्षों से भूस्खलन बड़ी समस्या बना हुआ है। अमरनाथ यात्रा के दौरान लंबे जाम का सामना यात्रियों को करना पड़ता है। सुरंग बनने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से सेना के वाहनों की आवाजाही भी आसान हो सकेगी।

दोनों तरफ की सुरंगों पर काम वर्ष 2022 में एक साथ शुरू किया गया था। परियोजना अब अंतिम चरण में पहुंच रही है। डिगडोल-पंथ्याल ट्विन ट्यूब टनल का निर्माण न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग विधि का उपयोग करके किया जा रहा है। यह जटिल भूवैज्ञानिक स्थितियों में भूमिगत खोदाई के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली विधि है।

टनल से संभव होगा हर मौसम में आवागमन
एनएचएआई के क्षेत्रीय अधिकारी आरएस यादव ने बताया कि रामबन-बनिहाल खंड पर सुरंग और पुल का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इसका निर्माण अमरनाथ यात्रा से पहले पूरा कर लिया जाएगा। यात्रा के दौरान सभी वाहन इस सुरंग से होकर गुजरेंगे। यात्रा के साथ ही टनल बन जाने से सुरक्षित और हर मौसम में काम करने वाली कनेक्टिविटी विकसित होगी। जहां यात्रियों को पहले आवाजाही के लिए मार्ग बाधित होने की स्थिति में घंटों इंतजार करना पड़ता था अब मार्ग पर भूस्खलन या बर्फबारी का कोई खास असर देखने को नहीं मिलेगा। वाहन कुछ ही मिनटों में इन सुरंगों से सुरक्षित रूप से गुजर सकेंगे। कठिन और अनिश्चित यात्रा अब सुरक्षित, तेज और अधिक विश्वसनीय होकर उनके दैनिक जीवन का हिस्सा बन जाएगी।

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