परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी छलांग, कलपक्कम रिएक्टर ने हासिल की क्रिटिकैलिटी

भारत ने तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित परमाणु ऊर्जा संयंत्र में क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली। अगर भारत का परमाणु कार्यक्रम इसी क्रिटिकैलिटी की सफल राह पर आगे बढ़ा तो परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनने में देर नहीं लगेगी। इसका असर यह होगा कि भारत जल्द ही पारंपरिक जीवाश्म ईंधन से ऊर्जा पैदा करने की जगह स्वच्छ अक्षय ऊर्जा पैदा करने के लिए तैयार हो जाएगा।

भारत के 500 मेगावाट क्षमता वाले प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) के प्रथम क्रिटिकैलिटी स्तर पर पहुंचने के बाद सरकार ने मंगलवार को कहा कि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर उच्च तापीय दक्षता के साथ विश्वसनीय, कम कार्बन उत्सर्जन वाली बेस-लोड बिजली आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

नियंत्रित परमाणु विखंडन श्रृंखला प्रतिक्रिया की शुरुआत का यह मील का पत्थर देश की दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और स्वदेशी परमाणु प्रौद्योगिकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (एईआरबी) द्वारा निर्धारित सभी सुरक्षा मानदंडों को पूरा करने के बाद, पीएफबीआर ने सोमवार को क्रिटिकैलिटी हासिल कर ली।

तमिलनाडु के कलपक्कम में स्थित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) भारत का पहला स्वदेशी फास्ट ब्रीडर परमाणु रिएक्टर है।

500 मेगावाट क्षमता वाले इस उन्नत रिएक्टर को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (आइजीसीएआर) की ओर से डिजाइन और भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (भाविनी) की तरफ से निर्मित किया गया है। इसे बनाने में 200 से ज्यादा भारतीय उद्योगों और लघु एवं मध्यम उद्योगों की भूमिका रही है।

भारत का परमाणु ऊर्जा विभाग इस दौरान परमाणु ईंधन के सही और पूरी क्षमता के साथ इस्तेमाल की कोशिशों में जुटा है। चूंकि अन्य कोई भी देश अपनी संवेदनशील परमाणु ऊर्जा तकनीक भारत को मुहैया कराने के लिए तैयार नहीं हुआ है।

इसलिए आइजीसीएआर ने खुद ही एक परिपूर्ण फास्ट ब्रीडर रिएक्टर को बनाने में ताकत झोंक दी। इसी का नतीजा है कि कलपक्कम में पीएफबीआर भी अब सफलता की ओर है।

इस रिएक्टर को भविष्य में थोरियम-232 का उपयोग करके यूरेनियम-233 का उत्पादन करने के लिए भी डिजाइन किया गया है, जो स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के लिए भारत के विशाल थोरियम भंडार का दोहन करने के दीर्घकालिक लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।

भारत की असैन्य परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छह अप्रैल को इस उपलब्धि की घोषणा करते हुए इसे भारत की असैन्य परमाणु यात्रा में एक निर्णायक कदम बताया। उनके साथ-साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर, देश-विदेश के वैज्ञानिकों ने भी इस उपलब्धि की चर्चा शुरू कर दी।

अगर यह संयंत्र सारे प्रयोगों में सफल हो जाता है और इसे बिजली पैदा करने के लिए वाणिज्यिक यानी कमर्शियल ग्रिड से जोड़ दिया जाता है तो भारत दुनिया का सिर्फ दूसरा ऐसा देश बन जाएगा, जिसके पास व्यावसायिक रूप से संचालित होने वाला फास्ट ब्रीडर रिएक्टर होगा। अब तक यह उपलब्धि सिर्फ रूस के पास ही मौजूद है।

क्या होती है क्रिटिकैलिटी

क्रिटिकैलिटी किसी परमाणु रिएक्टर के संचालन की वह खास स्थिति है, जिसमें परमाणु विखंडन की श्रृंखला प्रतिक्रिया स्थिर हो जाती है और यह प्रतिक्रिया लगातार जारी रखने में सक्षम हो जाती है।

इसका मतलब है कि यह रिएक्टर अब बिना किसी बाहरी दखल के मौजूदा ईंधन के जरिए ऊर्जा पैदा करने के लिए तैयार हो गया है। हालांकि, यह बताना भी अहम है कि क्रिटिकैलिटी हासिल करना सीधे तौर पर बिजली पैदा करना नहीं है, बल्कि यह उसके लिए सबसे जरूरी और पहली शर्त है।

अब इस रिएक्टर की क्षमता और कुशलता को समझने के लिए कम-क्षमता वाले कुछ परीक्षण किए जाएंगे, जिसके बाद इसे पावर ग्रिड से जोड़कर बिजली उत्पादन शुरू किया जा सकता है।

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