नयागढ़ का रघुनाथ जीऊ मंदिर है आस्था का केंद्र, मिलते हैं दाढ़ी-मूंछ वाले राम जी

ओडिशा के नयागढ़ जिले में स्थित रघुनाथ जीऊ मंदिर इन दिनों अपनी अनोखी परंपरा और अद्भुत मूर्तियों को लेकर चर्चा में है। यहां भगवान राम और लक्ष्मण की मूर्तियां दाढ़ी और मूंछ के साथ स्थापित हैं, जो देशभर के मंदिरों में विरले ही देखने को मिलती हैं। माता सीता की प्रतिमा भी विशेष है, उनका चेहरा हल्का झुका हुआ है, मानो वे श्रीराम के चरणों को निहार रही हों। यही विशेषता इस मंदिर को आस्था के साथ-साथ जिज्ञासा का केंद्र बनाती है।
263 साल पुरानी परंपरा, आज भी कायम
करीब 263 वर्ष पहले स्थापित इस मंदिर की मूर्तियां नीम की लकड़ी से निर्मित हैं। खास बात यह है कि इतने वर्षों के बाद भी इन पर न तो मौसम का असर पड़ा है और न ही जल या शृंगार का। भक्तों का मानना है कि यह चमत्कार नहीं, बल्कि भगवान की दिव्य शक्ति का प्रमाण है।
नवरात्र में बदलता है भगवान का स्वरूप
मंदिर के वरिष्ठ पुजारी के अनुसार, नवरात्र के नौ दिनों में भगवान अलग-अलग रूप धारण करते हैं। इनमें प्रमुख हैं—
वनवासी रूप, चित्रकूट वास, ताड़का वध।
नवमी के दिन राम नवमी पर मंदिर में विशेष उत्सव होता है। इस दिन भगवान का भव्य स्वर्ण शृंगार किया जाता है।
बताया जाता है कि साल में पांच बार स्वर्ण अलंकरण होता है, जिसे देखने दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
अत्रि मुनि आश्रम से जुड़ी कथा
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान कभी अत्रि मुनि का आश्रम था। वनवास के दौरान भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता यहां ठहरे थे। कथा के अनुसार, अत्रि मुनि भगवान के वनवासी रूप से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उसे सदा स्मरण रखने की इच्छा जताई। तभी भगवान राम ने उन्हें तीन शालिग्राम देने का वचन दिया। यही कारण है कि यहां आज भी भगवान का वनवासी स्वरूप विशेष महत्व रखता है।
स्वर्ण कलश और कलिंग शैली की भव्यता
मंदिर की वास्तुकला कलिंग शैली में निर्मित है, जो ओडिशा की प्राचीन स्थापत्य परंपरा को दर्शाती है।
मंदिर के शिखर पर 15-15 किलो के तीन स्वर्ण कलश स्थापित हैं
परिसर को भद्र मंडप, नाट मंडप और दर्शन मंडप में विभाजित किया गया है
इसी कारण यह क्षेत्र ‘स्वर्ण कलश मंदिर’ के नाम से भी प्रसिद्ध है।
सुबह से शाम तक पूजा-भोग की परंपरा
मंदिर में प्रतिदिन सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक विभिन्न पूजा और भोग अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु यहां आकर न केवल पूजा करते हैं, बल्कि मंदिर की शांति, दिव्यता और ऐतिहासिक विरासत का अनुभव भी करते हैं।
आस्था के साथ कौतूहल का संगम
दाढ़ी-मूंछ वाले राम की यह अनोखी छवि जहां एक ओर भक्तों की आस्था को और मजबूत करती है, वहीं दूसरी ओर यह मंदिर इतिहास, संस्कृति और परंपरा का जीवंत उदाहरण बनकर उभरता है। ओडिशा की इस धरोहर ने साबित कर दिया है कि भारत में आस्था के रूप अनेक हैं और हर रूप अपने आप में अद्वितीय है।





