ज्ञानवापी केस: एक साल तीन दिन बाद भी एएसआई रिपोर्ट पर नहीं हो सकी बहस

ज्ञानवापी में एएसआई सर्वे की रिपोर्ट पर एक साल तीन दिन बाद भी बहस नहीं शुरू होने पर हिंदू पक्ष ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई की मांग की है।
ज्ञानवापी में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के सर्वे के एक साल तीन दिन बाद भी उससे संबंधित रिपोर्ट पर अदालत में बहस नहीं शुरू हो सकी है। 839 पेज की रिपोर्ट जस की तस है। इस बीच अब हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल कर मांग की है कि ज्ञानवापी से संबंधित वर्ष 1991 से लेकर वर्ष 2023 तक के 15 वादों की एक साथ सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में हो। ऐसे में जब तक सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं आ जाएगा, तब तक ज्ञानवापी से संबंधित 15 मुकदमों की सुनवाई गति नहीं पकड़ेगी।
ज्ञानवापी से संबंधित वर्ष 1991 का पहला वाद प्राचीन मूर्ति स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लॉर्ड विश्वेश्वर का है। यह वाद मौजूदा समय में सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत में विचाराधीन है। वर्ष 2021 के साध्वी पूर्णांबा और वर्ष 2022 के राखी सिंह, भगवान अविमुक्तेश्वर विराजमान व मुख्तार अहमद अंसारी के वाद भी सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत में विचाराधीन है।
वर्ष 2023 का संचित रस्तोगी और श्री नंदीजी महाराज के वाद भी सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत में विचाराधीन हैं। इसके अलावा जिला जज की अदालत में वर्ष 2023 के सत्यम त्रिपाठी, देवी मां शृंगार गौरी, मां गंगा, लॉर्ड श्री आदि विश्वेश्वर ज्योतिर्लिंग, श्री नंदीजी महाराज, भगवान आदि विश्वेश्वर, स्वामी श्री अविमुक्तेश्वरानंद व शैलेंद्र कुमार पाठक के वाद विचाराधीन हैं। उक्त सभी 15 वादों की इलाहाबाद हाईकोर्ट से एकसाथ सुनवाई की मांग सुप्रीम कोर्ट से की गई है।
मसला त्वरित गति से निस्तारित होगा : जैन
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि ज्ञानवापी को लेकर एक ही प्रकृति के कई वाद दाखिल हैं। इसलिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की गई है कि अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि के मुकदमे के जैसे ही ज्ञानवापी से संबंधित मुकदमों की एकसाथ नियमित सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में हो। इससे ज्ञानवापी से संबंधित मसला त्वरित गति से निस्तारित होगा।
हमने आपत्ति दाखिल की है : यासीन
अंजुमन इंतेजामिया मसाजिद कमेटी के संयुक्त सचिव एसएम यासीन ने कहा कि हम कानून पर भरोसा करते हैं। हमने हिंदू पक्ष की याचिका पर आपत्ति दाखिल की है। यदि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट ही सारे मामले सीधे सुनने लगेंगे तो फिर नीचे की अदालतों का क्या काम रह जाएगा? हमारे अपीलीय अधिकार का क्या होगा? इसलिए हिंदू पक्ष की याचिका का खारिज होना तय है।
एएसआई के सर्वे में 32 जगह मंदिर के साक्ष्य का दावा
एएसआई के सर्वे में ज्ञानवापी में 32 जगह मंदिर के साक्ष्य मिलने का दावा किया गया है।। 25 जनवरी 2024 को हिंदू पक्ष की ओर से एएसआई की सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक की गई थी। तहखाने में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां मिलने का दावा किया गया है। भगवान शिव और विष्णु के तीन नाम जनार्दन, रुद्र और उमेश्वर लिखा मिलने का दावा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार ज्ञानवापी की पश्चिमी दीवार हिंदू मंदिर का हिस्सा है। जो स्तंभ मिले हैं, वह भी हिंदू मंदिर के हैं। स्तंभों का मस्जिद में इस्तेमाल किया गया है।
30 साल बाद आधी रात तहखाने में शुरू हुई थी पूजा
ज्ञानवापी परिसर स्थित व्यासजी के तहखाने में 30 साल बाद 31 जनवरी 2024 की आधी रात अदालत के आदेश से पूजा-पाठ शुरू किया गया था। अदालत ने व्यासजी के तहखाने का रिसीवर जिलाधिकारी को नियुक्त किया है। व्यास परिवार के उत्तराधिकारी ने अदालत को बताया था कि आदि विश्वेश्वर की पूजा का उनके परिवार का 473 वर्षों का इतिहास है। वर्ष 1551 में व्यास परिवार के शतानंद व्यास ने आदि विश्वेश्वर की पूजा शुरू की थी।
कृति वाशेश्वर मंदिर को लेकर भी दाखिल है वाद
हरतीरथ स्थित भगवान कृति वाशेश्वर मंदिर में निर्विघ्न पूजा-पाठ और राग-भोग की मांग करते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन अश्वनी कुमार की अदालत में वाद दाखिल किया गया है। भगवान कृति वाशेश्वर की ओर से नेवादा सुंदरपुर निवासी संतोष सिंह, माधव मार्केट के श्रीशचंद्र तिवारी, बेनियाबाग के विकास कुमार शाह की ओर से यह वाद दाखिल किया गया है।
वादी पक्ष का कहना है कि वर्ष 1659 में औरंगजेब ने हरतीरथ स्थित कृति वाशेश्वर मंदिर को ध्वस्त करने और वहां आलमगीर मस्जिद बनाने का प्रयास किया। मगर, वह हिंदुओं को भगवान कृति वाशेश्वर की पूजा से नहीं रोक सका। आज भी खुले आसमान के नीचे भगवान कृति वाशेश्वर की पूजा जारी है।





