रेसलर मौसम खत्री की हुई शादी, रिश्ते में बदली सालों पुरानी दोस्ती

सोनीपत/झज्जर।सोनीपत के रहने वाले अंतरराष्ट्रीय पहलवान मौसम खत्री रविवार को शादी के बंधन में बंध गए। उन्होंने अंकिता के साथ ब्याह रचाया है, जिसके चलते दो परिवारों की 30 साल पुरानी दोस्ती रिश्ते में बदल गई। बरात के स्वागत से लेकर फेरों तक की सभी रस्में झज्जर के शहनाई गार्डन में संपन्न हुई। इस दौरान कांग्रेस नेता डॉ. अशोक तंवर, कुलताज और ओलंपियन पहलवान योगेश्वर दत्त समेत कई हस्तियां विवाहित जोड़े को आशीर्वाद देने पहुंची।
ये है अंकिता की फैमिली…
– बता दें कि पहलवान मौसम खत्री की शादी झज्जर के गांव खुंडन की अंकिता पुत्री कप्तान सिंह के साथ तय हुई है। अंकिता सोनीपत के जीवीएम कॉलेज में एमएससी प्रथम वर्ष की स्टूडेंट हैं।
– अंकिता की छोटी बहन अंशुल बारहवीं कक्षा में हैं, जबकि बड़ा भाई अक्षय बीटेक कर चुका है।
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एक दिन पहले सोनीपत में हुई थी सगाई की रस्म
– शनिवार को पहलवान की सगाई का प्रोग्राम सोनीपत के गीतांजलि गार्डन में हुआ था। यहां भी सुशील कुमार, योगेश्वर दत्त, कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष ब्रजभूषण समेत कई बड़ी हस्तियों ने मौसम व उनके परिवार वालों को शादी की शुभकामनएं दी।
बरात से दुल्हन की विदाई तक कब-कब क्या-क्या हुआ
– रविवार को मौसम सोनीपत के गांव पांची जाटान से बरात लेकर झज्जर के लिए रवाना हुए। वह झज्जर रात करीब 10 बजे पहुंचे।
– बरात का स्वागत कप्तान सिंह व उनके परिवार के बुजुर्गों ने किया। शहनाई गार्डन से कुछ पहले बरात को रोककर मिलनी की रस्म अदा की गई। फिर दूल्हे के सभी यार-दोस्त नाचते-झूमते करीब साढ़े 11 बजे पंडाल में पहुंचे। यहां द्वारपूजा समेत तमाम रस्में पूरी की गई।
– 12 बजे वर-वधु ने एक-दूसरे को जयमाला पहनाई। फिर स्टेज पर मौसम ने अंकिता को हाथ पकड़कर चढ़ाया।
– प्रीतिभोज के बाद कुछ लोगों को छोड़कर बरात वापस सोनीपत के लिए रवाना हो गई। वहीं लगभग 2 बजे तक शगुन की रस्म चल रही थी और फिर फेरों व विदाई की रस्म के बाद विदाई हुई।
– इस पूरे समारोह के दौरान मौसम एकदम हरियाणवी पहनावे धोती-कुर्ते में दिखाई दिए तो अंकिता लाल जोड़े में बेहद सुंदर लग रही थी।
जानिए कौन हैं मौसम खत्री
– हरियाणा पुलिस में सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात मौसम खत्री 26 वर्ष के हैं।
– वे सोनीपत के गांव पांची जाटान के रहने वाले हैं। पिता सूबे सिंह भी पहलवान थे, उन्हीं से प्रेरित होकर कुश्ती लड़ना सीखा।
– खत्री एशियाड गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर चुके हैं। वह इससे पहले भी कई बार हिंद केसरी प्रतियोगिता जीत चुके है।
– वे सोनीपत के गांव पांची जाटान के रहने वाले हैं। पिता सूबे सिंह भी पहलवान थे, उन्हीं से प्रेरित होकर कुश्ती लड़ना सीखा।
– खत्री एशियाड गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल हासिल कर चुके हैं। वह इससे पहले भी कई बार हिंद केसरी प्रतियोगिता जीत चुके है।
– इस दौरान मौसम की बहन पुष्पा ने कहा कि मौसम शादी के बाद भी खेल में अच्छा प्रदर्शन करेगा और इसी तरह प्रदेश और जिले का नाम रोशन करेगा।
ये है खत्री की डाइट
– मौसम खत्री हर रोज छह घंटे प्रैक्टिस करते हैं।
– मौसम रोजाना की डाइट में अंडे, दिन में करीब 1 किलो चिकन और पांच से सात लीटर दूध पीते हैं।
– नेशनल लेवल विनर खत्री उन छह पहलवानों में से एक हैं, जो 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में डोपिंग टेस्ट में फेल हो गए थे।
– मौसम खत्री हर रोज छह घंटे प्रैक्टिस करते हैं।
– मौसम रोजाना की डाइट में अंडे, दिन में करीब 1 किलो चिकन और पांच से सात लीटर दूध पीते हैं।
– नेशनल लेवल विनर खत्री उन छह पहलवानों में से एक हैं, जो 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में डोपिंग टेस्ट में फेल हो गए थे।
रियो ओलंपिक में जगह नहीं बना सके थे मौसम
– रियो खेलों की अंतिम क्वालीफाइंग प्रतियोगिता में मौसम खत्री ओलंपिक कोटा हासिल नहीं कर पाए थे।
– खत्री 97 किग्रा फ्रीस्टाइल भार वर्ग के सेमीफाइनल में उन्हें मंगोलिया के खुदेरबुल्गा दोरखंड के खिलाफ 6-8 से शिकस्त का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण उनका रियो के लिए क्वालीफाई करने की उम्मीद टूट गई थी।
– खत्री 97 किग्रा फ्रीस्टाइल भार वर्ग के सेमीफाइनल में उन्हें मंगोलिया के खुदेरबुल्गा दोरखंड के खिलाफ 6-8 से शिकस्त का सामना करना पड़ा था, जिसके कारण उनका रियो के लिए क्वालीफाई करने की उम्मीद टूट गई थी।
ये है दोनों परिवारों के मिलन की कहानी
– बता दें कि मौसम के पिता पहलवान सूबे सिंह व अंकिता के पिता कप्तान सिंह आज से तीस साल पहले एक साथ पहलवानी किया करते थे।
– उस दौरान मौसम खत्री के गांव पांची के दरिया सिंह पहलवान भी उनके साथ थे। कप्तान सिंह कहना है कि उनकी बेटी को वे पहलवान नहीं बना सके, क्योंकि अंकिता की पढ़ाई में रुचि अधिक थी। बेटी को पढ़ाने के साथ ही उन्होंने अपने दोस्त के बेटे को दामाद बनाने का फैसला कर लिया।





