एससी-एसटी में क्रीमी लेयर के खिलाफ भाजपा में भी उठी मांग

आरक्षण में कोटे में कोटे की व्यवस्था पर सुनवाई करते हुए पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और जनजाति में क्रीमी लेयर बनाने को लेकर जो मत दिया था, उस पर राजनीतिक दल अब अपना रुख स्पष्ट कर रहे हैं। भाजपा ने साफ कर दिया है कि वह इसके पक्ष में नहीं है।

शुक्रवार को भाजपा के एससी-एसटी वर्ग के सांसदों का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिला और आग्रह किया कि इसे लागू न किया जाए। इस भेंट-वार्ता की सूचना को इंटरनेट मीडिया पर साझा करते हुए पीएम मोदी ने भी एससी-एसटी वर्ग के सशक्तीकरण व कल्याण के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताते हुए इशारा कर दिया है कि वह भी क्रीमी लेयर बनाने के पक्ष में नहीं हैं।

SC ने राज्यों को दिया था निर्देश

सुप्रीम कोर्ट की सात सदस्यीय संविधान पीठ ने पिछले दिनों आरक्षण में कोटे में कोटे पर विस्तृत निर्णय सुनाते हुए यह मत भी रखा था कि राज्य सरकारें एससी-एसटी के आरक्षण में क्रीमी लेयर को अलग करें, ताकि आरक्षण के लाभ से वंचित रह गए कमजोर तबके को इसका पूरा लाभ मिल सके। चूंकि, कोर्ट के इस सुझाव के पालन को राजनीतिक प्रभाव भी तय है, इसलिए धीरे-धीरे राजनीतिक दलों ने इस पर अपना रुख साफ करना शुरू कर दिया है।

क्षेत्रीय दल जता चुके हैं असहमति

कई क्षेत्रीय दल पहले ही इस मत से असहमति जता चुके हैं और शुक्रवार को भाजपा के एससी-एसटी वर्ग के सांसदों का प्रतिनिधिमंडल संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिला। सूत्रों ने बताया कि दल में लोकसभा व राज्यसभा के करीब 100 सदस्य थे। उन्होंने पीएम मोदी से आग्रह किया कि एससी-एसटी वर्ग के आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था को लागू न किया जाए।

पत्रकारों से बातचीत में सांसद सिकंदर कुमार ने बताया कि एससी-एसटी की क्रीमी लेयर को आरक्षण नहीं दिए जाने के सुप्रीम कोर्ट के सुझाव को लेकर लोगों के फोन आ रहे हैं। वह आरक्षण को लेकर चिंतित हैं। इसी चिंता को लेकर सांसद प्रधानमंत्री से मिले और इस विषय पर गंभीर चर्चा हुई। कुमार ने दावा किया कि पीएम ने आश्वस्त किया है कि एससी-एसटी के आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था को लागू नहीं किया जाएगा। सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने भी यही दावा किया।

पीएम मोदी ने दिए संकेत

प्रधानमंत्री मोदी ने भी सांसदों के साथ हुई इस मुलाकात की फोटो अपने एक्स हैंडल पर साझा की और लिखा, ‘अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से आज मुलाकात की। हमने अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के कल्याण और सशक्तीकरण की प्रतिबद्धता को दोहराया।’ पीएम के इन शब्दों का स्पष्ट संदेश है कि उनकी सरकार क्रीमी लेयर की व्यवस्था को लागू करने के पक्ष में नहीं है।

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