गजब! भूतों के लिए 45 लाख का घर, घूमने के लिए खरीद दी 45 लाख की कार

भूतों के लिए कोई 45 लाख का घर और घूमने के लिए कार खरीदता है क्या…? आप जरूर सोच में पड़ गए! लेकिन एमपी के जबलपुर में ऐसा ही हुआ. जहां अंधविश्वास के चलते एक ठग ने 7 साल से रिटायर्ड अफसर के परिवार को लूटता रहा. यह अंधविश्वास का जाल 10वीं पास ठग ने बुना और इसी अंधविश्वास के जाल में परिवार फंसता चला गया और करीब एक करोड़ रुपए गंवा बैठा.

हैरानी की बात तो यह है कि इस गिरोह में दो सगे भाई और उनका दोस्त भी शामिल था. जो डिजिटल युग इस दौर में भूत-प्रेत और तंत्र-मंत्र के नाम पर परिवार से करोड़ों रुपए ठग लिए. चारों आरोपी पीड़ित परिवार के घर में भूत-प्रेत का साया बताकर इस तरह घटना को अंजाम दिया. आपको बता दें कि पीड़ित परिवार की मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी. जहां आरोपियों ने अपने आप को ज्योतिष शास्त्र का प्रखंड विद्वान बताया था.

7 सालों से चल रहा था तंत्र-मंत्र का खेल
दरअसल, अंधविश्वास में ठगी की खेल की शुरुआत 2016 से हो चुकी थी. जहां अनंतारा के रिटायर्ड अफसर गुलाबचंद का परिवार ठग अरुण और वरुण के झांसे में आ गया था. जिसके चलते ठग 7 सालों तक ठगता रहा. जहां दोनों भाई अरुण और वरुण ने अपने दोस्त सचिन उपाध्याय के साथ परिवार को रोज नई-नई कहानी सुनाते थे. साथ ही त्रिदंडी स्वामी से संवाद का हवाला देकर खेल भी खेला करते थे. तब उन्हें परिवार के घर और जमीनों पर 14 भूतों का साया होने की कहानी गड़ी. इन्ही कहानियों को सुनकर रिटायर्ड अफसर डर गए थे. डर इतना भयंकर था कि दिन और रात में नींद ही नहीं आती थी.

दोनों भाई हैं फरार, दोस्त दबोचा गया
इसके बाद आरोपियों ने परिवार पर दबाव बनाया और भूतों को निकालने की बात कही. जिसके लिए रिटायर्ड अफसर गुलाबचंद का 45 लाख का मकान भी दान में ले लिया और कहां कि भूत उसी मकान में शिफ्ट हो रहे हैं. भूत वापस न आ जाए, इसलिए 40 लाख रुपए की एसयूवी कार भी रिटायर्ड अफसर से खरीदवाई. लिहाजा जब करोड़ों रुपए से रिटायर्ड अफसर हाथ धो बैठे. तब जाकर गोराबाजार थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई. जहां पुलिस ने जालसाज सचिन उपाध्याय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. लेकिन ठगी का मास्टरमाइंड 10वीं पास शांति नगर निवासी अरुण दुबे और उसका छोटा भाई वरुण दुबे फरार है. जिसकी तलाश की जा रही है.

आरोपियों की इस तरह हैं प्रोफाइल
अरुण दुबे:गैंग का मुख्य सरगना था. जिसने दसवीं तक पढ़ाई की है. जो लोगों को बातों में फंसाकर झांसा देने में तेज है. अरुण ही सारी प्लानिंग किया करता था और सोशल मीडिया से रिक्वेस्ट भेजता था. फिलहाल अरुण पुलिस की गिरफ्त से बाहर है.

वरुण दुबे:मुख्य आरोपी अरुण दुबे का छोटा भाई वरुण दुबे है. जो अपने भाई के साथ पूजा पाठ करवाता था. साथ ही ठगी में भी साथ देता था. वरुण तंत्र-मंत्र बोलने में एक्सपर्ट है. पूजा से किस तरह समाधान होगा, इसकी भूमिका वरुण की होती थी. फिलहाल वरुण भी पुलिस की गिरफ्तार से बाहर है.

सचिन उपाध्याय: अरुण दुबे और वरुण दुबे का पड़ोसी हैं. पीड़ित परिवार को झांसे में लेने के लिए अपने दोस्त सचिन उपाध्याय का सहारा लिया था. सचिन ने 12वीं तक पढ़ाई की है. जो प्राइवेट नौकरी करता था. बेरोजगार होने के कारण नौकरी छोड़ दी थी. दोनों के साथ ही रहकर उनके कहे अनुसार चलता था और ठगी में 10% हिस्सा लिया करता था.

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