फसलों का बॉडीगार्ड किसानों का मित्र है ये सांप, पूरे जीवन 25 हजार चूहों को है खाता

बरसात के मौसम आते हीं प्रकृति नए रूप ले लेती है. इस मौसम में कई समस्या भी चलकर आती है. इस मौसम में सर्पदंश का खतरा बढ़ जाता है. इस मौसम में इंसानों के साथ सांपों के लिए भी खतरा बढ़ जाता है. लोगों में इतनी भ्रांतियां फैली है की जहरीले सांप के साथ बिना जहर वाले सांप को भी लोग मार देते हैं. मगर वो सांप एक तरह से सुरक्षा का काम करता है.
झारखंड के पलामू जिले में नाग, करैत और बहिरा सांप पाए जाते हैं. जो कि जहरीले होते हैं. इसमें नाग और करैत को न्यूरोटॉक्सिन कहा जाता है. वहीं बहरा सांप को रसल्स वाइपर कहा जाता है. इसके अलावा इस इलाके में पाए जाने वाले कोई भी सांप जहरीले नहीं होते है. बावजूद इन सांपों को मार दिया जाता है. लोग जहरीले समझ कर इन्हें भी मार देते हैं. इसमें एक सांप धामण सांप होता है. जो किसानों के मित्र के समान है.
धामन है रैट स्नेक, खाता है 25 हजार चूहा
दरअसल, धामन को रैट स्नेक कहा जाता है. जो कि अपने जीवन काल में 25 हजार चूहों को खाता है.एक्सपर्ट डॉ.डी एस श्रीवास्तव ने लोकल 18 को बताया की इस सांप के बारे में कई भ्रांतियां फैली हुई है. जिसमें से एक है की धामन सांप गाय का दूध छानकर पी जाता है. लेकिन ये केवल एक भ्रांति है. क्योंकि इंसानों को दूध पसंद है तो इसका मतलब ये भी नहीं है की सांप को भी दूध पसंद है. इसके साथ दूध पचाने के लिए जो रसायन चाहिए होता है. वो रसायन सांप के पास नहीं होता है.
आगे बताया की सबसे ज्यादा भ्रांतियां सांप के बारे में फैलाई गई है. सांप कभी दूध छानकर पी नहीं सकता है. क्योंकि छानकर दूध पीने के लिए जीभ, तालू और गाल की आवश्यकता होती है. जो की सांप के पास गाल होता हीं नहीं है. उसके जीभ भी दो भागों में बंटे होते है. इसीलिए वो थन को पकड़कर दूध पी हीं नहीं सकता है. गाय बैल बांधने वाले जगह पर सांप इसीलिए मिलते है क्योंकि वहां गाय के लिए मौजूद चारा के पास चूहा छुपे होते है. जिसके पीछे सांप वहां पहुंचते है.
किसानों के लिए मित्र है धामन
एक्सपर्ट ने आगे कहा की धामन किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. धामन अपने जीवन काल में 25 हजार चूहों को खाता है. जिससे फसल नुकसान से बचता है. अगर आप एक धामन को मारते हैं तो आप 25 हजार चूहों के जीवन हो आजाद कर देते है. जो किसानों के लिए कितना नुकसानदेह हो सकता है. 25 हजार चूहों के और उनके बढ़ती संख्या को आजाद कर देते है. जिससे की भारी मात्रा में फसल नुकसान हो सकता है. इसीलिए धामन को कभी मारना नहीं चाहिए.





