इस खूबसूरत झील की सच्चाई है खौफनाक, जो भी गया अंदर, जिंदा बचना भी है मुश्किल!

सोशल मीडिया पर रूसी शहर नोवोसिबिर्स्क के एक झील की तस्वीरें इंटरनेट पर खूब वायरल हो रही हैं. किसी तस्वीर में बिकिनी में महिला पानी किनारे पोज देती हुई नजर आ रही हैं तो किसी में कोई शख्स बोटिंग करता दिख रहा है. लेकिन असल में ये सबकुछ छलावा है. सालों पहले भी इस झील की तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं, तब वैज्ञानिकों ने इसको लेकर चेतावनी जारी की थी और झील की खौफनाक सच्चाई से अवगत कराया था. तब वैज्ञानिकों ने कहा था कि टूरिस्ट्स को इसकी आकर्षक फिरोजा छटा से धोखा नहीं खाना चाहिए, क्योंकि ये झील असल में एक जहरीला जलाशय है. इसमें पास के बिजली संयंत्र से रासायनिक अवशेष डंप किए जाते हैं.
साइंटिस्ट्स ने बताया कि यह प्यारा रंग जो लोगों को स्वर्ग-सा अहसास दिलाता है, दरअसल वो पानी में घुले हुए कैल्शियम और धातु ऑक्साइड के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया का परिणाम है. ऐसे में अगर कोई इसके अंदर जाता है तो उसका जिंदा बचना भी मुश्किल हो सकता है. बता दें कि रूस के तीसरे सबसे बड़े शहर के स्थानीय निवासियों ने झील को “साइबेरियन मालदीव” कहना शुरू कर दिया था. ऐसे में लोग यहां पर सेल्फी लेने आने लगे तो कई लोग फैशन और शादी की फोटोग्राफी के लिए भी आने लगे. कुछ ने तो झील में सैर का प्लान भी बनाया.
हालांकि, तब बिजली संयत्र से जुड़ी कंपनी का कहना था कि तालाब जहरीला नहीं है, लेकिन पानी अत्यधिक क्षारीय है. ऐसे में अगर कोई इसके पानी को छूता है तो उसके त्वचा में जलन हो सकती है. अपने सोशल मीडिया पेज पर कंपनी ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देते हुए कहा, “सेल्फी के चक्कर में राख के ढेर में न गिरें.” इतना ही नहीं, कंपनी ने ये भी कहा था कि झील मात्र 3 से 6 फीट गहरी है और नीचे काफी कीचड़ है. ऐसे में अगर कोई गिर जाता है तो बिना मदद के उसे पानी से बाहर निकालना “व्यावहारिक रूप से असंभव” है.
चेतावनी के बावजूद टूरिस्ट्स का झील में आना जारी है और कुछ तो पानी में भी घुस जाते हैं. लेकिन पानी में जाने वालों को इसका खामियाजा भी भुगतना पड़ता है. कभी किसी के चेहरे पर दाना हो जाता है तो कभी कोई नाक-गला सूखने की शिकायत करता है. कई लोग कहते हैं कि पानी से तेज डिटर्जेंट की गंध आती है. बता दें कि झील प्राकृतिक नहीं है. इसे नोवोसिबिर्स्क शहर को ऊर्जा प्रदान करने वाले थर्मल पावर स्टेशन पर कोयला जलाने के परिणामस्वरूप निकलने वाली रासायनिक राख को डंप करने के लिए खोदा गया था. 1970 के दशक में निर्मित यह बिजली संयंत्र साइबेरिया में अपनी तरह का सबसे बड़ा संयंत्र है.





