एमपी: सागर में इको फ्रेंडली गेहूं के भूसे से बनाए चाय के कुल्हड़ और स्ट्रॉ

चाय और कॉफी के लिए इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के कप सिर्फ पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं, बल्कि इनके इस्तेमाल से कैंसर का खतरा भी बढ़ जाता है। विल्कप के रूप में कुल्हड़ तो हैञ लेकिन, इसके इस्तमाल से भी प्रदूषण होता है। इसके विकल्प के रूप में सागर के एक स्टार्टअप भूसे से चाय के कप और स्ट्रॉ बना रहा है। ये कुल्हड़ और प्लास्टिक से भी सस्ते हैं। कुल्हड़, प्लास्टिक, पेपर के कप और स्ट्रॉ जहां कचरे को बढ़ावा देते हैं, जबकि भूसे से बने कप और स्ट्रॉ के उपयोग के बाद इन्हें गाय, भैंस भी खा सकती हैं। साथ ही इनका उपयोग खाद के रूप में भी किया जा सकता है। इसके चलते ये पर्यावरण के लिए बेहद फायदेमंद हैं।

यह स्टार्टअप सागर की ही रहने वाली डॉ. निलय शर्मा ने शुरू किया है। उन्होंने स्टार्टअप का नाम ‘सेव अर्थ’ रखा है। डॉ. शर्मा के मुताबिक अभी हम 40 हजार कप प्रतिमाह उपलब्ध करा रहे हैं।

स्ट्रॉ और कप बनाने के फॉर्मूला पर शर्मा कहती हैं कि कंटेंट पूरे नहीं बता सकती पर इसमें भूसा को ग्राइंड किया और खाने वाली चीजों का पेस्ट बनाया। इसमें किसी भी प्रकार के कैमिकल का उपयोग नहीं है। जो हम खाते हैं, वही सामग्री मिलाई है। उसी से बाइंडर तैयार किया और उसे मोल्ड किया। इसी तरह कप और स्ट्रॉ बना रहे हैं।

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