दुनिया का आठवां अजूबा…चूल्हे पर नहीं, सिर पर आग जलाकर बना लेता है चाय

कलाकारी दिखाने की कोई उम्र नहीं होती है. यह बात मध्य प्रदेश में आज भी चरितार्थ होते दिखाई दे रही है. महाराष्ट्र के जामभोरा गांव के रहने वाले किसान दौलत राव पाटिल के बेटे पिछले 10 वर्षों से अपने सिर पर आग लगाकर चाय बनाने की कलाकारी लोगों को दिखा रहे हैं. अब लोग भी उनकी कलाकारी के दीवाने हो गए हैं. उनका जिस भी स्थान पर कार्यक्रम होता है वहां पर लोगों की भीड़ लग जाती है. वे निशुल्क कार्यक्रमों में अपनी सेवा देते हैं.

जब लोकल 18 ने बुजुर्ग कलाकार शंकर  दौलतराव पाटिल से बात की तो उन्होंने बताया कि मेरे पिता किसान है. मैं भी खेती करता हु. अब मैं पिछले 10 वर्षों से अपने सिर पर आग जलाकर चाय बना रहा हूं. मैं करीब आधे घंटे तक अपने सिर पर आग जला कर रखता हूं. यह कलाकारी मुझे गॉड गिफ्ट मिली है. ब्रह्माकुमारी आश्रम बुरहानपुर मैं बीके मंगल दीदी की ओर से आयोजित कार्यक्रम में निशुल्क सेवा दे रहा हूं. मेरे द्वारा मानसरोवर मेले में यह कलाकारी दिखाई गई. मेरी कलाकारी देखने के लिए मध्य प्रदेश महाराष्ट्र और गुजरात के भक्त भी इस मेले में शामिल हुए.

सर पर ऐसे जलाते हैं आग
कलाकार का कहना है कि सबसे पहले 10 वर्ष पहले मेने माउंट टापू में इस कलाकारी को सीखा था. यह कलाकारी मैं सीख कर बताना शुरू की. सबसे पहले मैं कपड़े की चंबल बनाता हूं. जिसमें मिट्टी का तेल डालता हूं. उसके बाद आग लगाता हूं. और सर पर एक गिला कपड़ा रखता हूं. एक मिट्टी का लेयर अपने सिर पर डालता हूं. जिससे आधे घंटे तक यह आग जलती रहती है. और मुझे कोई नुकसान नहीं पहुंचता है. मेने प्रेक्टिस करने के बाद कलाकारी दिखाना शुरू की है.

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