मध्य प्रदेश में कल हो सकता है कैबिनेट विस्तार, मंत्री ले सकते हैं शपथ

मध्य प्रदेश में सोमवार को कैबिनेट विस्तार हो सकता है। सूत्रों के मुताबिक, 18-20 विधायक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। मध्य प्रदेश में नई सरकार के गठन को 10 दिन से अधिक हो चुके हैं लेकिन अभी तक कैबिनेट विस्तार नहीं हुआ है। बीजेपी ने मोहन यादव को एमपी की कमान सौंपी है। इसके साथ ही दो उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला और जगदीश देवड़ा बनाए गए हैं। नरेंद्र सिंह तोमर को विधानसभा का अध्यक्ष बनाया गया है।

बता दें कि नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने मध्य प्रदेश में प्रचंड बहुमत की सरकार बनाई। चुनाव में भाजपा ने 230 विधानसभा सीटों में से 165 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं, कांग्रेस को 66 सीटों से ही संतोष करना पड़ा। सरकार गठन के बाद मध्य प्रदेश में कैबिनेट विस्तार की अटकलें लगाई जा रही हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री और डिप्टी सीएम के अलावा अभी किसी सभी मंत्रालय खाली पड़े हैं। ऐसे में भाजपा जल्द से जल्द कैबिनेट विस्तार करना चाहेगी।

दिल्ली में मोहन यादव
मध्य प्रदेश ने नवनिर्वाचित सीएम मोहन यादव इन दिनों दिल्ली के दौरे पर हैं। उन्होंने दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, आईबी, खेल एंव युवा मामलों के मंत्री अनुराग ठाकुर समेत कई केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात की है। सूत्रों की मानें तो मोहन यादव की अमित शाह और जेपी नड्डा से कैबिनेट विस्तार को लेकर भी चर्चा हुई है।

लोकसभा चुनाव को लेकर क्षेत्रीय संतुलन साधने पर रहेगा फोकस
भारतीय जनता पार्टी अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव का असर कैबिनेट विस्तार में भी देखा जा सकता है। बीजेपी जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए आगे की रणनीति पर विचार कर रही है। माना जा रहा है कि मोहन यादव की कैबिनेट में युवा और अनुभव दोनों का मिश्रण होगा। इसके अलावा, विध्य और मालवा क्षेत्र के विधायकों को मौका मिल सकता है।

बताते चलें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी को मध्य प्रदेश में 29 लोकसभा सीटों में से 28 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई थी। बीजेपी 2024 में भी इस रिकॉर्ड को बरकरार रखना चाहेगी।  गौरतलब है कि 2018 के विधानसभा चुनाव में करीबी मुकाबले में बीजेपी को कांग्रेस के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन लोकसभा चुनाव में जबरदस्त वापसी करते हुए सभी राजनीतिक पंडितों को आश्चर्यचकित कर दिया था।

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