आज हम आपको खेल और राजनीति से जुड़ें वो किस्से बताएंगे जिसने सुर्खियां बटोरीं..

खेल जगत और राजनीति भले ही ये दो अलग-अलग क्षेत्र हैं, लेकिन इन दोनों ही क्षेत्रों के लोगों का नाता एक-दूसरे से काफी गहरा रहा है और इनके रिश्तों का असर खेल और राजनीति पर भी देखने को मिला है। कहा जाता है कि खेल में राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है, लेकिन भारत में खेल और राजनीति का रिश्ता विवादों से भरा रहा है। बीते कुछ दिनों से देश में खेल और राजनीति को लेकर एक बार फिर विवाद गर्माया हुआ है। यह विवाद कॉमनवेल्थ गेम्स के घोटाले से शुरू हुआ था।

बता दें कि कॉमनवेल्थ घोटाला साल 2011 में सामने आया और इसे भारत के सबसे बड़े घोटालों में से एक कहा जाता है। माना जाता है कि दिल्ली में आयोजित हुए इन खेलों में बड़े पैमाने पर पैसों का घपला किया गया, जिसमें कई नेता भी शामिल थे, जिसका खुलासा बाद में हुआ। कॉमनवेल्थ गेम्स से लेकर कई ऐसे मौके खेल जगत में आए, जिसमें खेल और राजनीति जगत के लोग एक साथ शामिल थे। कभी घोटाला तो कभी उत्पीड़न और कभी आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला चलता रहा है। तो आइये आज हम आपको खेल और राजनीति से जुड़ें वो किस्से बताएंगे जिसने देश में सुर्खियां बटोरीं।

पहलवानों ने बढ़ाई बृजभूषण शरण सिंह की मुश्किलें

बृजभूषण शरण सिंह इन दिनों महिला पहलवानों द्वारा लागाए आरोपों के कारण चर्चाओं में हैं। बृजभूषण सिंह भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष हैं और पहलवान इन दिनों उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरने पर बैठे हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ दो मामले भी दर्ज किए हैं।

क्या है आरोप

  • बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ पहली FIR एक नाबालिग द्वारा लगाए गए आरोप से संबंधित है, जिसे यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दर्ज किया गया है।
  • इसके अलावा दूसरी FIR यौन शोषण से संबंधित आईपीसी की प्रासंगिक धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
  • बृजभूषण शरण पर लगे आरोपों की जांच के लिए एक निगरानी समिति का गठन किया गया है।
  • ये निगरानी समिति अगले 4 हफ्ते में अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी।

कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले में फंसे सुरेश कलमाड़ी

साल 2010 में दिल्ली में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स भारत के लिए एक ऐतिहासिक झण था। जिस शानदार तरीके से इस गेम्स का आयोजन हुआ, उसका अंत होने के बाद कॉमनवेल्थ गेम्स में घोटाले की बात ने पूरे देश को चौंका दिया था। कॉमनवेल्थ घोटाला देश के इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स के नाम पर लगभग 70,000 करोड़ रुपये का घोटाला किया गया। कॉमनवेल्थ खेल समिति के अध्यक्ष सुरेश कलमाड़ी पर इस घोटाले का आरोप लगा। खेल समिति के अध्यक्ष के साथ-साथ सुरेश कलमाड़ी कांग्रेस पार्टी से भी जुड़े हुए थे। इन आरोपों के बाद सुरेश कलमाड़ी को कांग्रेस संसदीय पार्टी के सचिव पद से हटा दिया गया था। साथ ही उन्हें सीडब्ल्यूजी आयोजन समिति के प्रमुख पद से भी बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद में सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था।

शशि थरूर पर लगे आरोप

साल 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) का आगाज हुआ था। बहुत ही कम समय में आईपीएल ने दुनिया भर में खूब नाम कमाया। हिंदुस्तान के घर-घर तक में सिर्फ आईपीएल और उसकी चकाचौंध के ही चर्चे रहे। हालांकि, साल 2010 आते-आते आईपीएल भी विवादों में घिर गया। देश के तत्कालीन विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर का विवादों में नाम आया। शशि थरूर पर आरोप लगा था कि उन्होंने उस दौरान अपनी महिला मित्र सुनंदा पुष्कर को आईपीएल कोच्चि टीम में हिस्सेदारी दिलवाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग किया था। ये खुलासा आईपीएल के कमिश्नर ललित मोदी ने किया था। हालांकि, बाद में विवाद बढ़ने पर शशि थरूर को मंत्री पद से हटना पड़ा था।

स्पोर्ट्स डेवलपमेंट बिल के विरोध में उतरे कैबिनेट मंत्री

साल 2011 में तत्कालीन मनमोहन सरकार में खेल मंत्री अजय माकन ने नेशनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट बिल को कैबिनेट के सामने रखा था। हालांकि, कैबिनेट ने इस बिल को खारिज कर दिया। उस दौरान कई मंत्रियों ने इस पर आपत्ति जताई, जिसके बाद खेल मंत्री को इस बिल पर दोबारा काम करने के लिए कहा गया। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यूपीए के अधिकतर सहयोगी दल इस बिल को लेकर नाराज थे।

जब कीर्ति आजाद ने लगाए जेटली पर आरोप

  • पूर्व क्रिकेटर क्रीर्ति आजाद ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) पर साल 2015 में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। उन्होंने एक वीडियो भी जारी किया था।
  • कीर्ति आजाद ने दावा किया था कि वीकीलिक्स4मीडिया की जांच में पता चला है कि डीडीसीए ने कई फर्जी कंपनियों को ठेके दिए थे।
  • कीर्ति आजाद को भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान बिशन सिंह बेदी और अन्य पूर्व क्रिकेटर सुरिंदर खन्ना का भी इस मामले में साथ मिला था।
  • हालांकि, कीर्ति आजाद को बीजेपी सांसद अरुण जेटली पर आरोप लगाने के लिए पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था। क्योंकि उस समय डीडीसीए के अध्यक्ष अरुण जेटली थे।
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