पुंछ हमला स्थानीय लोगों के सक्रिय सहयोग से किया गया था, बिना समर्थन के ऐसे हमले नहीं किए जा सकते- DGP

राजौरी जिले के दरहल इलाके में चल रहे तलाशी अभियान का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि पुंछ हमला स्थानीय लोगों के सक्रिय सहयोग से किया गया था। स्थानीय समर्थन के बिना ऐसे हमले नहीं किए जा सकते।
जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने शुक्रवार को कहा कि पुंछ हमला स्थानीय लोगों की मदद से किया गया था। उन्होंने कहा कि 21 अप्रैल को पुंछ के भाटा दुरियां इलाके में हुआ हमला जिसमें पांच जवान बलिदान हो गए, सक्रिय स्थानीय समर्थन से अंजाम दिया गया था। डीजीपी ने बताया कि आतंकियों ने ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए स्टील की परत वाले कवच-भेदी गोलियों का इस्तेमाल किया था। ये गोलियां वाहन के लोहे को चीर कर जवानों को लगी थी।
शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने पर जानकारी देते हुए कहा कि आतंकवादियों ने स्थानीय लोगों की मदद से इस आतंकी हमले को अंजाम दिया। सेना के वाहन को निशाना बनाने के लिए आईईडी की इस्तेमाल किया गया था। डीजीपी ने बताया कि इस आतंकी हमले में शामिल आतंकियों के ठिकानों का पता लगाने के लिए सघन तलाशी की जा रही है। शुरुआती जांच में पता चला है कि राजौरी-पुंछ इलाके में 9 से 12 विदेशी आतंकवादी सक्रिय हो सकते हैं, जिन्होंने हाल ही में घुसपैठ की हो सकती है।

राजौरी जिले के दरहल इलाके में चल रहे तलाशी अभियान का जायजा लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि पुंछ हमला स्थानीय लोगों के सक्रिय सहयोग से किया गया था। स्थानीय समर्थन के बिना इस तरह के हमले नहीं किए जा सकते। डीजीपी ने बताया कि आतंकियों को एक जगह पनाह दी गई और फिर दूसरी जगह हमले को अंजाम देने के लिए ट्रांसपोर्ट मुहैया कराया गया। आतंकियों ने पूरे इलाके की उचित रेकी की थी और बारिश के बावजूद वह सेना के वाहन को निशाना बनाने में सफल रहे।
स्पेशल गोलियों और आईईडी का किया था इस्तेमाल
डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि आतंकवादी ने सेना के वाहन को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाने के लिए स्टील कोटेड कवच-भेदी गोलियों और आईईडी का इस्तेमाल किया। ढांगरी, राजौरी हमले में उन्हीं गोलियों का इस्तेमाल किया गया था। पुंछ हमला एक वन क्षेत्र के पास किया गया था। सेना के वाहन को तब निशाना बनाया गया था जब वह जंगल वाले क्षेत्र से गुजर रहा था और खराब मौसम की वजह से वाहन काफी धीरे चल रहा था। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि आतंकवादियों ने प्राकृतिक ठिकानों का इस्तेमाल किया होगा। जंगल के आसपास के क्षेत्र में ही उन्होंने अपना ठिकाना बनाया होगा।
शुक्रवार को डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि हम उन प्राकृतिक ठिकानों की पहचान कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल हमलावरों ने हमले से पहले किया होगा। इस आंतंकी हमले में शामिल आतंकियों को पकड़ने के लिए सघन तलाशी अभियान जारी है। एक सवाल के जवाब में डीजीपी ने कहा कि हाल के हमले में शामिल आतंकवादियों के समूह को दो भागों में बांटा जा सकता है और उनकी संख्या नौ से बारह के बीच हो सकती है।
स्थानीय लोगों ने की आतंकियों की मदद
स्थानीय समर्थन के बारे में डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि घाटी के स्थानीय निवासियों ने ही आतंकियों की मदद की थी। उन्होंने कहा कि गुरसई गांव निवासी स्थानीय निसार अहमद पहले से ही पुलिस की संदिग्ध सूची में था। वह 1990 से आतंकवादियों का सक्रिय ओजीडब्ल्यू रहा है। अतीत में उससे कई बार पूछताछ की गई थी। इस बार, सबूतों की पुष्टि करने के बाद उस पर कार्रवाई की गई है। निसार अहमद पुंछ हमले को अंजाम देने वाले आतंकवादियों को रसद और अन्य सहायता प्रदान करने में शामिल पाया गया है। डीजीपी ने कहा कि निसार का परिवार भी आतंकवादियों को सहायता प्रदान करने में शामिल है।
ड्रोन से गिराए गए थे हथियार
डीजीपी दिलबाग सिंह ने बताया कि आतंकियों ने जिन हथियार का इस्तेमाल किया था, वह हथियार ड्रोन के जरिए घाटी में गिराए गए थे। उन्होंने कहा कि हथियार, ग्रेनेड और नकदी ड्रोन से गिराए गए थे और निसार और उसके परिवार के सदस्यों द्वारा एकत्र किए गए थे। डीजीपी ने कहा, “हम उस जगह की पहचान कर रहे हैं जहां ड्रोन ने हथियार और नकदी गिराई थी।”
200 लोगों से हो चुकी है पूछताछ
डीजीपी दिलबाग सिंह ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि पुंछ आतंकी हमले को लेकर अब तक 200 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है और 12 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि निसार की गिरफ्तारी से जांच को एक दिशा मिली है और अब तक महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। सेना और पुलिस लगातार आतंकियों की तलाश में सर्च ऑपरेशन चला रही है।





