रामलला को सौंपी सुप्रीम कोर्ट ने फैसले की बागडोर…कहा ‘हमें यकीन था की…
श्रीरामजन्मभूमि विवाद मामले में रामलला विराजमान के वकील रहे 92 वर्षीय के. परासरण शनिवार को अपने परिवार और 18 अधिवक्ताओं की टीम संग अयोध्या पहुंच रामलला के दर्शन किए। सुबह रामलला का दर्शन करने के बाद कोर्ट के फैसले की एक प्रति रामलला को सौंपी।
के. परासरण के साथ उनके बेटे, बेटियां, नाती-पोते समेत उनके बेटे पूर्व सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरण मौजूद थे। वहीं विहिप के शीर्ष पदाधिकारियों ने अयोध्या के संत धर्माचार्यों की मौजूदगी में कारसेवकपुरण में के. परासरन और सीएस वैद्यनाथन के साथ उनकी पूरी टीम को सम्मानित किया।
अधिवक्ता बोले, हमें यकीन था केस हम ही जीतेंगे
परासरण के साथ दर्शन करने वालों में वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन, पीएस नरसिम्हा, पीवी योगेश्वरन, भक्तिवर्धन सिंह, श्रीधर पोटा राजू, अनिरुद्ध शर्मा आदि थे। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में अधिवक्ताओं ने कहा कि सबूतों के आधार पर हमें पूरा विश्वास था कि ये केस हम ही जीतेंगे।
परासरण के साथ दर्शन करने वालों में वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन, पीएस नरसिम्हा, पीवी योगेश्वरन, भक्तिवर्धन सिंह, श्रीधर पोटा राजू, अनिरुद्ध शर्मा आदि थे। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में अधिवक्ताओं ने कहा कि सबूतों के आधार पर हमें पूरा विश्वास था कि ये केस हम ही जीतेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में रोजाना हुई सुनवाई के बाद यह स्पष्ट भी होता गया। मंदिर को लेकर बनने वाले ट्रस्ट पर कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुसार ट्रस्ट की स्थापना हो, इसमें केंद्र व राज्य सरकार के प्रतिनिधि भी शामिल हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने किया स्थायी समाधान : मोहन परासरण
पूर्व सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरण ने कहा कि हाईकोर्ट ने फैसले को लेकर पंचायत की, उसने विवादित जमीन के तीन हिस्से कर उसका दो हिस्सा हिंदुओं व एक हिस्सा मुस्लिमों को दिया। यदि ऐसा होता तो तय था कि यहां नमाज भी होती और हिंदुओं के लाउडस्पीकर भी बजते।
पूर्व सॉलिसिटर जनरल मोहन परासरण ने कहा कि हाईकोर्ट ने फैसले को लेकर पंचायत की, उसने विवादित जमीन के तीन हिस्से कर उसका दो हिस्सा हिंदुओं व एक हिस्सा मुस्लिमों को दिया। यदि ऐसा होता तो तय था कि यहां नमाज भी होती और हिंदुओं के लाउडस्पीकर भी बजते।
कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में पंचायत नहीं की और समस्या का स्थायी समाधान किया। मुस्लिम पक्ष द्वारा फैसले के विरोध में रिव्यू की कही जा रही बात पर उन्होंने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट इसे स्वीकार ही नहीं करेगा।





