ट्रम्प के इस फैसले से दुखी है मलाला यूसुफजई, जानें क्या बोली?

पाकिस्तान की छात्र कार्यकर्ता और शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित मलाला यूसुफजई ने शरणार्थियों को लेकर अमेरिका की नई नीतियों पर दुख जताया है। मलाला ने कहा कि शरणार्थियों को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जो आदेश जारी किया है वो अत्यंत दुखत है। मलाला ने कहा ‘मैं अत्यंत दुखी हूं कि राष्ट्रपति ट्रंप हिंसा और युद्धग्रस्त देशों को छोड़कर भाग रहे बच्चों, माताओं और पिताओं के लिए दरवाजे बंद कर रहे है।’
इस नीति को लेकर जारी आदेश पर ट्रंप के हस्ताक्षर करने के कुछ देर बाद मलाला ने एक बयान में कहा, ‘दुनियाभर में अनिश्चितता और अशांति के इस समय में, मैं राष्ट्रपति ट्रंप से अनुरोध करती हूं कि वह विश्व के सबसे असहाय और असुरक्षित परिवारों को अकेला ना छोड़ें।’पाकिस्तान में लड़कियों के लिए शिक्षा की खुलकर वकालत करने वाली 19 वर्षीय मलाला नोबेल पुरस्कार पाने वाली सबसे कम उम्र की विजेता हैं। उन्हें भारत के शिक्षा कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रुप से 2014 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था।
आपको बता दें कि ट्रंप ने एक शासकीय आदेश पर दस्तखत किए हैं। यह आदेश चरमपंथी इस्लामी आतंकियों को अमेरिका से बाहर रखने के लिए नाम से है और सघन जांच के नए नियम तय करता है। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद अपने पहले पेंटागन दौरे में ट्रंप ने इस शासकीय आदेश पर दस्तखत किए। दस्तखत करने के बाद ट्रंप ने कहा, मैं चरमपंथी इस्लामी आतंकियों को अमेरिका से बाहर रखने के लिए सघन जांच के नए नियम स्थापित कर रहा हूं। हम उन्हें यहां देखना नहीं चाहते।
ट्रंप ने कहा, ‘‘हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हम उन खतरों को अपने देश में न आने दें, जिनसे हमारे सैनिक विदेशों में लड़ रहे हैं। हम सिर्फ उन्हीं को अपने देश में आने देना चाहते हैं, जो हमारे देश को सहयोग देंगे और हमारी जनता से गहरा प्रेम करेंगे।





