UK विधानसभा में 71 में से केवल 25 ने ही विधानसभा सचिवालय में दिया अपनी संपत्ति का ब्योरा

देशभर में भ्रष्टाचार पर अंकुश के लिए स को खासी तवज्जो दी जा रही है, लेकिन लगता है उत्तराखंड विधानसभा के अधिकांश सदस्यों की इसमें रुचि नहीं। यह बात इसलिए कही जा रही है क्योंकि प्रदेश की चौथी निर्वाचित विधानसभा अब लगभग ढाई साल का कार्यकाल पूरा करने जा रही है और इस वक्फे में एक मनोनीत विधायक समेत कुल 71 विधायकों में से केवल 25 ने ही विधानसभा सचिवालय में अपनी संपत्ति का ब्योरा दिया है।

उत्तराखंड में विधानसभा सदस्यों को अपनी संपत्ति का ब्योरा विधानसभा सचिवालय को देना होता है। हर साल इस ब्योरे को अपडेट कर विधानसभा सचिवालय इसका गजट नोटिफिकेशन करता है। उत्तराखंड में भी उत्तर प्रदेश मंत्री तथा विधायक (आस्तियों तथा दायित्वों का प्रकाशन) अधिनियम 1975 की धारा 3(2) एवं धारा 4 में निर्धारित समय के भीतर विधायकों से प्राप्त संपत्ति के विवरण को विधानसभा सचिवालय द्वारा सार्वजनिक किया जाता है।

सचिवालय से हर साल एक सर्कुलर जारी कर प्राप्त सूचना को प्रकाशित किया जाता है। विधायकों द्वारा संपत्ति का ब्योरा न देने के उदासीन रवैये के पीछे मुख्य कारण यह है कि यह प्रावधान बाध्यकारी नहीं, बल्कि स्वैच्छिक है। उत्तराखंड की मौजूदा चौथी विधानसभा जल्द अपना आधा, यानी ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर रही है। इस अवधि में 71 में से केवल 25 विधायकों ने ही विधानसभा सचिवालय में अपनी संपत्ति की जानकारी देने में रुचि प्रदर्शित की। शेष 46 विधायकों का रुख इस मामले में अब तक उदासीन ही है।

दिलचस्प बात यह है कि संपत्ति का ब्योरा न देने वालों में मंत्रिमंडल के चार सदस्य भी शामिल हैं। अगर सियासी पार्टियों की सदस्य संख्या के लिहाज से देखें तो भाजपा के 57 विधायकों (इनमें कैबिनेट मंत्री रहे स्व. प्रकाश पंत भी शामिल हैं, उन्होंने अपनी संपत्ति का ब्योरा विधानसभा सचिवालय को दे दिया था) में से केवल 24 ने ही संपत्ति का विवरण सचिवालय में दिया।

एक निर्दलीय विधायक भी यह प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। विपक्ष कांग्रेस के विधानसभा में 11 सदस्य हैं और इनमें से किसी ने अब तक अपनी संपत्ति का विवरण विधानसभा सचिवालय को नहीं दिया है। विधानसभा सचिवालय के मुताबिक इस वर्ष का गजट नोटिफिकेशन जल्द किया जा रहा है और इसके बाद ही पूरा ब्योरा सार्वजनिक रूप से उपलब्ध हो पाएगा।

उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के मुताबिक, सभी विधायकों को हर साल अपनी संपत्ति का ब्योरा देना चाहिए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। हालांकि, यह व्यवस्था स्वैच्छिक है, लेकिन इसे बाध्यकारी बनाने के लिए कोई प्रस्ताव आता है तो उस पर विचार किया जाएगा।

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