मोदी सरकार का अफसरों को दो टूक-या तो काम करें, नहीं होता तो काम छोड़कर घर बैठें

लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं से रेल मंत्री सुरेश प्रभु काफी खफा है। हाल ही में सियालदाह-अजमेर एक्सप्रैस के 15 डिब्बों के पटरी से उतरने की घटना के बाद रेलवे बोर्ड सदस्यों जोनल महाप्रबंधकों समेत तमाम आलाधिकारियों को रेल मंत्री के तीखे तेवर का सामना करना पड़ा। उन्होंने अफ सरों से दो टूक कहा कि या तो काम करें, नहीं होता तो काम छोड़ कर घर बैठें। प्रभु ने कड़े शब्दों में कहा कि जिम्मेदारी न निभाने वाले कर्मचारी या तो खुद ही अपना पद छोड़ दें वर्ना उन्हें हटा दिया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक 2 साल के कार्यकाल के दौरान रेल मंत्री सुरेश प्रभु को इतना क्रोधित शायद पहले कभी नहीं देखा गया। उनकी सभी को नसीहत थी कि अब ऐसा नहीं चलेगा या तो परिणाम दें या अपने लिए कोई और नौकरी देख लें। इस दौरान जहां रेलवे बोर्ड सदस्य रेल विकास निगम के अधिकारी सामने थे वहीं जी.एम. से भी वीडियो कांफै्रंसिंग के जरिए सवाल-जवाब हो रहे थे।
रेल मंत्री ने रेलवे सिस्टम की खामियों को दूर करने के लिए कोरिया और जापान के विशेषज्ञों को भी बुलाने का फैसला किया है। उन्होंने रिटायर्ड सी.ए.जी. विनोद राय से भी कहा कि सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए रेल सिस्टम में बदलाव की खातिर वे अपने सुझाव दें। रेलवे सूत्रों के मुताबिक रेल मंत्री ने कोरिया और जापान की रेल रिसर्च इंस्टीच्यूट के एक्सपर्ट को बुलाकर उनसे सेफ्टी इंतजामों पर सुझाव लेने को कहा है। रेल मंत्री ने देशभर के जनरल मैनेजरों के साथ बात करते हुए कड़े शब्दों में कहा कि यह नहीं हो सकता कि अफ सर पावर तो लें लेकिन जवाबदेही नहीं।
उन्होंने रेलवे के जोनल अफ सरों को निर्देश दिए कि वे 1 सप्ताह में अपने पूरे इंस्टालेशन का इंस्पैक्शन कर खामियों को दूर करें। इसके बाद रेल मंत्रालय पूरा सेफ्टी ऑडिट कराएगा। इसके अलावा यह भी निर्देश दिए गए हैं कि 10 दिन तक सभी मेल और एक्सप्रैस ट्रेनों में अफ सर इंजन में बैठकर जाएगा और देखेगा की सभी सेफ्टी पहलुओं को ध्यान में रखा जा रहा है कि नहीं। ट्रेनों के सभी 45 हजार कोचों की सेफ्टी बढ़ाने के लिए एक्शन प्लान बनाया जाएगा। इसी बीच वित्त मंत्रालय ने भी कहा कि सेफ्टी के काम के लिए पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी।





