सर्दियों के वार से परेशान हैं अर्थराइटिस रोगी तो एक्‍सपर्ट से जानें बचाव के तरीके…

यूं तो सर्दियों का मौसम बहुत सुहाना होता है, लेकिन अक्सर इस दौरान जोड़ों में दर्द बढ़ जाता है। जी हां हवा में चुभन का यह मौसम बुजुर्गों और अर्थराइटिस के रोगियों की परेशानी बढ़ा देता है। इस मौसम में कई रोगियों के घुटने का दर्द, अकड़न और असहजता बढ़ जाती है क्योंकि वातावरण में प्रेशर के कारण ब्‍लड सर्कुलेशन में बाधा होती है। इसे अक्सर आयु सम्बंधी नुकसान या मौसमी बदलाव समझा जाता है, लेकिन यह अर्थराइटिस के लक्षण हो सकते हैं।सर्दियों के वार से परेशान हैं अर्थराइटिस रोगी

क्‍या कहते हैं एक्‍सपर्ट
नई दिल्ली स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल के आर्थोपेडिक्स विभाग के डायरेक्‍टर डॉक्‍टर धनंजय गुप्ता के अनुसार, “लोग सर्दियों में आलसी हो जाते हैं। इससे घुटने प्रभावित हो सकते हैं और अगर आपका पहले से अर्थराइटिस का ट्रीटमेंट चल रहा है तो उस हालत में दर्द बढ़ सकता है। अगर दर्द बहुत तेज है और घुटने का अर्थराइटिस पुराना हो चुका है, तो टोटल नी रिप्लेसमेन्ट (टीकेआर) पर विचार किया जा सकता है।”

डॉक्‍टर गुप्ता ने कहा, “जब दवा और ऑर्थोस्कोपिक उपचार से रोगी को राहत नहीं मिलती है, तब इंजेक्‍शन की सलाह दी जाती है। गंभीर रूप से विकृत घुटनों के लिए यह अंतिम विकल्प है और सबसे सुरक्षित ऑर्थोपेडिक प्रोसीजर में से एक है। मजबूत इंप्लांट से रोगग्रस्त नी कैप को बदलने से दर्द दूर होता है, घुटने की कार्यात्मकता वापस आ जाती है और रोगी के जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होता है। प्रोसीजर के बाद सही फिजियोथेरेपी करने से रोगी 6 हफ्ते में पूरी तरह ठीक हो जाता है।”

बचाव के उपाय
सावधानियों के बारे में बताते हुए डॉक्‍टर गुप्ता ने कहा, “कभी-कभी ऐसे रोगियों को भी सर्दी के दौरान दर्द होता है, जो चिकित्सकीय सलाह ले चुके हैं या घुटने की सर्जरी करवा चुके हैं। डॉक्टर के पास जाकर आप लक्षणों को बेहतर तरीके से समझेंगे। विशेषज्ञ आपकी मेडिकल प्रोफाइल का विश्लेषण करेंगे और उसके अनुसार सावधानी बताएंगे, जैसे एक्‍सरसाइज, फिजियोथेरैपी, सही डाइट, सप्‍लीमेंट आदि, ताकि सर्दियों के दौरान हड्डियां मजबूत रहें।”

उन्होंने कहा, “इसके अलावा एक्टिव लाइफस्‍टाइल को अपनाकर जोड़ों के दर्द को दूर रखा जा सकता है, विशेषकर अर्थराइटिस के रोगियों के लिए। घर के बाहर ठंडी हवा को एक्‍सरसाइज में बाधा मत बनने दीजिए।
काम करते हुए या घर में रहते हुए छोटे ब्रेक लेकर चलते भी रहिए, ताकि आपका वेट कंट्रोल में रहे।

जोड़ों के लिए विटामिन डी सबसे अच्छा है। जितना हो सके, धूप में रहें।
अपने भोजन में पोषक तत्वों और विटामिन से प्रचुर आहार शामिल करें, जैसे संतरा, पालक, फूलगोभी, डेयरी उत्पाद और सूखे मेवे।”

डॉक्‍टर गुप्ता ने कहा, “घुटनों के जोड़ में किसी अन्य जोड़ की तुलना में सबसे ज्यादा तनाव पड़ता है, इसलिए भारी-भरकम स्वेटर या कार्डिगन जिससे आपके शरीर का वजन बढ़ जाता है, इन्हें पहनने के बजाये हल्‍के गर्म कपड़े पहनें। जोड़ों का मूवमेंट अपने पेरिफेरल एरियाज में ब्‍लड सर्कुलेशन को बढ़ाता है और इससे अकड़न कम होती है। इसलिए अपने कंबल से बाहर निकलिए और थोड़ी सी स्ट्रेचिंग एवं चहलकदमी कीजिए।”

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