आजादी के बाद नदियों पर ढाया गया सबसे ज्यादा कहर: सीएम योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दो दिवसीय वाराणसी दौरे में शनिवार को बीएचयू पहुंचे। जहां उन्होंने आईआईटी बीएचयू की 100वीं ग्लोबल एल्युमनी मीट का उद्घाटन किया। इस दौरान योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पुरातन ज्ञान की परंपरा को आधुनिक तकनीक से जोड़कर मानवता का कल्याण किया जा सकता है। तकनीक अभी महंगी है और उसे सरल करने के लिए प्रयास होना चाहिए।
योगी आदित्यनाथ ने कहा काशी की तरह ही आईआईटी बीएचयू को पुरातन आत्मा के साथ आधुनिक काया लेनी होगी। आने वाले 100 सालों में देश के भविष्य के लिए विज़न तैयार करना होगा। योगी ने भारत सरकार के स्वच्छ भारत मिशन का जिक्र किया और कहा स्वच्छता से स्वास्थ्य, जीवन स्तर और नारी गरिमा में सुधार हुआ है। गोरखपुर सहित पूर्वोत्तर यूपी में इंसेफ्लाइटिस बीमारी का जिक्र कर स्वच्छता के जरिये इससे निजात के बारे में बताया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा, तकनीक से भ्रष्टाचार मुक्त समाज भी तैयार होता है। राशन वितरण में ई पॉश मशीन, लोन सहित अन्य योजनाओं के बारे में सरकार की पहल की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने कहा, तकनीक को सरल करना होगा। इससे समाज मे खुशहाली आएगी और साथ ही भविष्य की चुनौतियों के लिए अभी से जुटना होगा।
योगी ने कहा कि आईआईटी बीएचयू देश भर के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के सरलीकरण, गोवंश के मूत्र और गोबर से ऊर्जा स्रोत, गांवो में गोबर से मिथेन व कार्बनडाईऑक्साइड को अलग करने की तकनीक पर काम करें। देश के सामने जल संरक्षण बड़ी चुनौती है। आजादी के बाद सबसे ज्यादा कहर नदी, तालाब और पोखरों पर ढाया गया है। इन सबको ध्यान में रखते हुए तकनीक को सरल और सस्ती करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, आईआईटी बीएचयू और कानपुर सरकार के नॉलेज पार्टनर हैं, इन्हें यूपी में आने वाली चुनौतियों के समाधान खोजने चाहिए। चार दिवसीय एल्युमनी मीट में आने वाले 100 सालों में देश को क्या देना है, इस पर चर्चा होनी चाहिए। इससे आईआईटी बीएचयू के निदेशक पीके जैन ने किए जा रहे पहल की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आगामी सालों में इंस्टिट्यूट ऑफ आर्टिटेक्चर शुरू होने, 5जी के लिये मिनिस्ट्री ऑफ कम्युनिकेशन) से एमओयू, अमेजन एशिया व सिस्को लैबकी स्थापना की जानकारी दी। समापन के बाद सीएम झांसी के लिए रवाना हुए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, 1916 में महात्मा गांधी बीएचयू की स्थापना के समय काशी विश्वनाथ मंदिर गए थे और गंदगी, दुर्व्यवस्था की बात की थी। 100 साल तक महात्मा गांधी की बात पर अमल का समय नहीं मिला, 2016 में पीएम मोदी की पहल पर कार्ययोजना के साथ काम शुरू हुआ। 41 मंदिर को पुनर्जीवित किया गया है। पूरा क्षेत्र हेरिटेज जोन बन गया है।





