व्यापार वार्ता के बीच विवादित द्वीप से गुजरा अमेरिकी युद्धपोत, चीन भड़का

व्यापारिक तनाव को कम करने के लिए बीजिंग में चल रही उच्च स्तरीय व्यापार वार्ता के बीच अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत विवादित दक्षिण चीन सागर से गुजरने पर चीन भड़क गया। इसको लेकर चीन ने सोमवार को अमेरिका के समक्ष विरोध दर्ज कराया। चीन ने कहा कि अमेरिका को इस तरह के ‘भड़काऊ’ कदम से परहेज करना चाहिए और मौजूदा कारोबारी विवाद पर सफल वार्ता के लिए माहौल बनाने का प्रयास करना चाहिए। 
चीन बोला, कारोबारी विवाद पर सफल वार्ता के लिए माहौल बनाए अमेरिका
अमेरिका का निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोत दक्षिण चीन सागर में विवादित पारासेल द्वीप के पास से होकर गुजरा। यह वाकया ऐसे वक्त हुआ है, जब दोनों देशों के अधिकारी कारोबारी विवाद सुलझाने के लिए बीजिंग में मंगलवार तक चलने वाली दो दिवसीय बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। दुनिया की दो शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं ने एक दूसरे के उत्पादों पर 300 अरब डालर से ज्यादा का आयात शुल्क लगाया है। पारासेल द्वीप के पास से होकर अमेरिकी युद्धपोत के गुजरने पर चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू कांग ने कहा, ‘बीजिंग ने इस मुद्दे पर अमेरिका के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
अमेरिकी जहाज चीन की अनुमति के बिना विवादित क्षेत्र से गुजरा। अमेरिका का यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इससे क्षेत्र की शांति पर असर पड़ता है।’ यह पूछने पर कि क्या इस अभियान का असर दोनों देशों के बीच बीच मौजूदा व्यापार वार्ता पर पड़ेगा? इस पर उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि व्यापारिक विवाद का समुचित समाधान दुनिया के लिए जरूरी है। दोनों पक्षों के लिए यह आवश्यक है कि वार्ता का माहौल बनाया जाए।’
हमने समुद्री क्षेत्र पर दावों को चुनौती दी: अमेरिका
अमेरिका प्रशांत बेड़े की प्रवक्ता रचेल मैक्मर ने कहा, ‘समुद्री क्षेत्र को लेकर बढ़ चढ़कर किए जा रहे दावे को चुनौती देने के लिए अमेरिकी पोत नौवहन संचालन की स्वतंत्रता के तहत पारासेल द्वीप से होकर गुजरा। जहां भी अंतरराष्ट्रीय कानून इसकी इजाजत देगा, अमेरिकी नौसेना के जहाज उस क्षेत्र से गुजरेंगे और यह दक्षिण चीन सागर में भी लागू होता।’ बताते चलें कि दक्षिण चीन सागर स्थित पारासेल द्वीप समहूों पर ताइवान, ब्रुनेई, मलयेशिया, फिलीपींस और वियतनाम अपना-अपना हक जताते हैं। वहीं, चीन तकरीबन समूचे दक्षिण चीन सागर को अपने क्षेत्र का हिस्सा बताता है और उसने कृत्रिम तरीके से बनाए गए द्वीप में सैन्य ठिकाना भी बनाया है।





