सेक्स वर्कर: तो इसलिए घुटन भरे पेशे से नहीं निकलना चाहती लाखों लड़कियां, वजह बेहद अजीब…

सेक्स वर्कर्स की सेहत और सुरक्षा को लेकर देश में कई संगठन काम कर रहे हैं। इनमें से कई संगठन इस पेशे को कानून के दायरे में लाने की मांग कर रहे हैं। इन संगठनों का कहना है कि या तो सरकार इसे अपराध की श्रेणी से बाहर निकाले या फिर इन पेशे में जुड़ी लड़कियों को रोजगार के दूसरे विकल्प दिए जाएं।
“अब ज्यादातर सेक्स वर्कर मजबूरी में इस पेशे में आती हैं, लेकिन होती उनकी मर्जी है। इसलिए उनके काम को पेशे का दर्जा दिया जाए। हमारे संगठन में जितनी महिलाएं जुड़ी हैं, उनमें कई शारीरिक और मानसिक शोषण का शिकार हो चुकी हैं, जब वो ऐसे शोषण का शिकार हो चुकी हैं तो अपने मन से काम क्यों नहीं कर सकती हैं।” सेक्स वर्कर राइट एक्टिविस्ट कुसुम कहती हैं।
दिल्ली में कांफ्रेंस में हुई शामिल
कुसुम ऑल इंडिया नेटवर्क ऑफ सेक्स वर्कर संगठन से जुड़ी हैं। इस संगठन में देश के 16 राज्यों की 2 लाख महिलाएं शामिल बताई जाती हैं। संगठन में विभिन्न इलाकों, जाति-धर्म और संप्रदाय से जुड़े कम्यूनिटी बेस्ड 90 से ज्यादा संगठन शामिल हैं। कुसुम 20 से 24 नवंबर को दिल्ली में महिलाओं के लिए काम करने वाले संगठन क्रिया द्वारा आयोजित कॉन्फ्रेंस में शामिल होने पहुंची थीं। इस कॉन्फ्रेंस का नाम था, नारीवादी नेतृत्व, आंदोलन निर्माण और अधिकार प्रशिक्षण।
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इसे गलत काम मानते हैं
कुसुम बताती हैं, “इस संगठन में शामिल ज्यादातरों में कोई घर की मजबूरी, बच्चों का पेट पालने, या फिर पति बच्चों की बीमारी के चलते ये काम शुरू करती हैं, लेकिन वो जिनके लिए ये काम करती हैं, वहीं पता चलने पर उन्हें नहीं अपनाते, क्योंकि इसे गलत काम माना जाता है। लोग सीधे बदचलन समझते हैं। लेकिन यहां आने के बाद कई महिलाएं इसे गलत नहीं मानती हैं, अगर सरकार इसे गलत मानती है तो उसे चाहिए इऩ लोगों को कहीं नौकरी या फिर दूसरे रोजगार दिए जाएं।” हमारे काम को कानूनी पेशे का दर्जा मिलना चाहिए सेक्स वर्कर संगठन की कोशिश है कि किसी तरह सेक्स वर्कर को लेकर लोगों का नजरिया बदले। कुसुम कहती हैं, “हमारे काम को कानूनी पेशे का दर्जा मिलना चाहिए। मजदूर का दर्जा मिले, और अपराध की श्रेणी से बाहर रखा जाए।”





