इन 5 दिग्गजों का करियर खत्म होने की कगार पर, कभी भी ले सकते हैं संन्यास


एक नजर डालते हैं कुछ ऐसे ही खिलाड़ियों पर…
गंभीर की ही तरह युवराज सिंह ने भी 2007 वर्ल्ड टी-20 और 2011 वन-डे विश्वकप में टीम इंडिया को वर्ल्ड चैंपियन बनाने में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन पिछले कुछ समय से युवी का बल्ला पूरी तरह शांत पड़ चुका है।
कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से गुजरने के बाद फिटनेस युवी की बड़ी समस्या रही। रणजी और विजय हजारे जैसे टूर्नामेंट में भी सिक्सर किंग रन के लिए तरसते नजर आए। आईपीएल के अगले सत्र के लिए किंग्स-XI पंजाब ने भी उन्हें टीम से रिलीज कर दिया है।
उनके 2019 विश्वकप में खेलने की संभावना भी न के बराबर है। 12 दिसंबर को 37 साल के होने जा रहे युवराज सिंह भी अगर गंभीर की ही तरह जल्द ही संन्यास की घोषणा कर दें तो हैरानी नहीं होनी चाहिए।
टीम इंडिया से बाहर होने के बाद अब भज्जी घरेलू क्रिकेट में भी कम ही नजर आते हैं। महज आईपीएल के प्रदर्शन के दम पर टीम में वापसी करना उनके लिए असंभव है। यह बात वे भी भली-भांति जानते हैं।
मैदान के बजाय आजकल कमेंटरी करते नजर आने वाला भारतीय टीम का यह टर्बनेटर अगर संन्यास की घोषणा करता है तो किसी के लिए हैरानी नहीं होगी।
इस फेहरिस्त में अगला नाम किसी जमाने में दिग्गज कपिल देव का उत्तराधिकारी समझे जाने वाले इरफान पठान का है। चोट और लगातार फिटनेस समस्याओं के चलते इस खिलाड़ी का करियर समय से पहले ही समाप्त हो गया।
2006 में पाकिस्तान के खिलाफ एतिहासिक हैट्रिक फिर 2008 में पर्थ की विकेट पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने चमकदार खेल से सभी को प्रभावित करने वाले इरफान 2007 टी-20 विश्वकप विजेता टीम का भी हिस्सा थे।
2012 में आखिरी बार भारतीय जर्स में नजर आने वाले इस खिलाड़ी को पिछले साल आईपीएल में कोई खरीददार तक नहीं मिला। अब वे भी कमेंटेटर के रूप में नजर आते हैं।
आईपीएल में अच्छे प्रदर्शन को देखते हुए पिछले साल भारतीय चयनकर्ताओं ने रैना की टीम इंडिया में वापसी कराई। मगर वे इस सुनहरे अवसर को भुनाने में पूरी तरह नाकाम रहे। नतीजतन उन्हें एक बार फिर टीम से बाहर होना पड़ा।
अब घरेलू क्रिकेट में भी यह खब्बू बल्लेबाज कुछ खास करने में नाकामयाब ही साबित हो रहा। लिहाजा उनकी वापसी भी टीम इंडिया में मुश्किल लग रही है।
यही वजह है कि हमने उन्हें इस फेहरिस्त में शामिल किया है पर साथ ही साथ उनके लिए अच्छी बात ये है कि दूसरे खिलाड़ियों की तुलना में उनकी उम्र कम है, और हो सकता है कि इस वजह से रैना अभी संन्यास लेने का फैसला न करें।
36 वर्षीय अमित मिश्रा के साथ शायद किस्मत ने भी न्याय नहीं किया, प्रतिभा के धनी मिश्रा को जब भी टीम इंडिया के लिए खेलने का मौका मिला है उन्होंने हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश की है। लेकिन इसे संयोग ही कहा जाएगा कि जब वह युवा थे तो टीम इंडिया के पूर्व कप्तान और दिग्गज लेग स्पिनर अनिल कुंबले के रहते हुए उन्हें नियमित तौर पर टीम में जगह नहीं मिल पाई।
इसके बाद आर अश्विन की आंधी और रविंद्र जडेजा के जादू के बीच मिश्रा जी का मैजिक वह चमक नहीं बिखेर पाया। अब जब वह 36 बसंत पार कर गए हैं तो टीम में युजवेंद्र चहल और कुलदीप यादव के तौर पर बेहतरीन युवा फिरकी का विकल्प मिल चुका है।
अमित मिश्रा ने भारत के लिए 22 टेस्ट मैचों में 76 विकेट जबकि 36 वनडे में 64 विकेट झटक चुके हैं। टी20 इंटरनेशनल में भी 15 की बेहतरीन औसत से 10 मैचों में 16 विकेट हैं।





