पीएम मोदी ने आज 50वीं बार की ‘मन की बात’, कहा- रेडियो कार्यक्रम की यात्रा जारी रहेगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को कहा कि भारत का मूल-प्राण राजनीति या राजशक्ति नहीं बल्कि समाजनीति और समाज-शक्ति है तथा ऐसे में सब कुछ ‘राजनीति’ हो जाना, स्वस्थ समाज के लिए एक अच्छी व्यवस्था नहीं है। आकाशवाणी पर प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि जब ‘मन की बात’ शुरू हुई थी तभी उन्होंने तय किया था कि न तो इसमें राजनीति हो, न ही इसमें सरकार की वाहवाही हो और न ही इसमें कहीं मोदी हो। उन्होंने कहा कि उनके इस संकल्प के लिये सबसे बड़ा संबल, सबसे बड़ी प्रेरणा लोगों से मिली।
प्रधानमंत्री ने मन की बात के 50वें एपिसोड को संबोधित करते हुए अपने कुछ व्यक्तिगत अनुभव भी साझा किए। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मोदी आएगा और चला जाएगा, लेकिन यह देश अटल रहेगा, हमारी संस्कृति अमर रहेगी। 130 करोड़ देशवासियों की छोटी-छोटी यह कहानियाx हमेशा जीवित रहेंगी और देश को नयी प्रेरणा तथा उत्साह से नयी ऊंचाइयों पर ले जाती रहेंगी।’
उन्होंने कहा कि ‘मन की बात’ के 50वें एपिसोड की सबसे बड़ी सिद्धि यही है कि आप प्रधानमंत्री से नहीं, बल्कि अपने एक निकटतम साथी से सवाल पूछ रहे हैं। ‘यही तो लोकतंत्र है।’ मोदी ने कहा, ‘कभी-कभी ‘मन की बात’ का मजाक भी उड़ता है लेकिन मेरे मन में हमेशा ही 130 करोड़ देशवासी बसे रहते हैं। उनका मन मेरा मन है। ‘मन की बात’ सरकारी बात नहीं है- यह समाज की बात है। ‘मन की बात’ एक महत्वाकांक्षी भारत की बात है।’
उन्होंने कहा कि भारत का मूल-प्राण राजनीति नहीं है, भारत का मूल-प्राण राजशक्ति भी नहीं है। भारत का मूल-प्राण समाजनीति है और समाज-शक्ति है। समाज जीवन के हजारों पहलू होते हैं और उनमें से ही एक पहलू राजनीति भी है। राजनीति सबकुछ हो जाए, यह स्वस्थ समाज के लिए एक अच्छी व्यवस्था नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कभी-कभी राजनीतिक घटनाएं और राजनीतिक लोग, इतने हावी हो जाते हैं कि समाज की अन्य प्रतिभाएँ और अन्य पुरुषार्थ दब जाते हैं। भारत जैसे देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए जन-सामान्य की प्रतिभाओं, पुरुषार्थ को उचित स्थान मिले, यह हम सबका एक सामूहिक दायित्व है और ‘मन की बात’ इस दिशा में एक नम्र एवं छोटा सा प्रयास है।





