मन में बस चुकी कुरीतियों को दूर करें- कुलदीप सिंह

सुलतानपुर। सीताकुंड स्थित स्वामी विवेकानन्द विद्यापीठ स्कूल में गुरु नानक जयंती बहुत ही धूमधाम से मनाया गया। मुख्य अतिथि सरदार कुलदीप सिंह ने बच्चों को गुरु नानक देव जी के बारे में बताते हुए उन्हें उनके द्वारा दिए गए उपदेशों पर चलने की प्रेरणा देते हुए समाज से ऊंच नीच के भेद भाव को मिटाने की बात कही। विशेष अतिथि सरदार हरजीत सिंह रहे।
सरदार कुलदीप सिंह ने बताया कि गुरु नानक देव ने सिख धर्म की स्थापना की थी। समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करने के लिए उन्होंने अपने पारिवारिक जीवन और सुख का ध्यान न करते हुए दूर-दूर तक यात्राएं की और लोगों के मन में बस चुकी कुरीतियों को दूर करने की दिशा में काम किया। इस साल 23 नवंबर, शुक्रवार को इनका जन्मदिन है। हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को इनका जन्मदिन प्रकाश पर्व के रूप में मनाया जाता है। नानकजी का जन्म रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गांव में कार्तिक पूर्णिमा के दिन खत्रीकुल में हुआ था, जो अक्टूबर-नवंबर में दीवाली के 15 दिन बाद पड़ती है। इनके पिता का नाम मेहता कालूजी था, माता का नाम तृप्ता देवी था। तलवंडी का नाम आगे चलकर नानक के नाम पर ननकाना पड़ गया। इनकी बहन का नाम नानकी था। नानक बचपन से ही प्रखर बुद्धि के लक्षण दिखाई देने लगे थे। बचपन से ही इनमें सांसारिक विषयों के प्रति कोई खास लगाव नहीं था। पढ़ने लिखने में इनका मन नहीं लगा और मात्र 8 साल की उम्र में स्कूल छूट गया क्योंकि भगवत्प्रापति के संबंध में इनके प्रश्नों के आगे अध्यापक ने हार मान ली। और इन्हे घर वापस ले गये। इस मौके पर प्रबंधक मुकेश तिवारी ने बच्चों को सम्बोधित किया। साथ ही स्कूल के प्रधानाचार्य मृत्युंजय सिंह ने छात्रों को प्रोत्साहित कर उनकी उज्जवल भविष्य की कामना की। इस दौरान उमा द्विवेदी, सरिता शुक्ला, प्रवेश वैश्य, नीतू सिंह, गरिमा, शिवम, सत्यम, शिल्पी मधु, निधि तिवारी सहित अन्य शिक्षिकाए मौजूद रही।
रिपोर्ट- विकास आनन्द





