जिला अस्पताल के सीएमएस पर नर्सों ने लगाया गम्भीर आरोप

सुलतानपुर, 22 नवम्बर (UjjawalPrabhat.Com)। हमेशा चर्चा में रहने वाले जिला अस्पताल के प्रभारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. वीबी सिंह पर जिला अस्पताल से निष्कासित तीन स्टाफ नर्सों ने गम्भीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सीएमएस द्वारा जो आदेश मा. मुख्यमंत्री जी का बताया जा रहा है वह फर्जी है। उनके द्वारा अनुचित दबाव बनाया जा रहा था। जिसकी पूर्ति न होने पर षड्यंत्र कर हम तीन जिसमें एक पुरूषों व दो महिला स्टाफ नर्सां की सेवा समाप्त कर दिया है। उनका आरोप यह भी है कि सीएमएस डा. वीबी सिंह हम लोगों से कभी भी सीएमएस कार्यालय में समस्याओं से सम्बंधित बात नहीं किये। जब भी हम लोग अपनी समस्या को लेकर आफिस में जाते तो डा. वीबी सिंह रात आठ बजे के बाद अपने निजी नर्सिंग होम (गीता हास्पिटल) में बुलाते। नर्सों का यहां तक कहना है कि डा. वीबी सिंह हम लोगों से अभद्र भाषा में बात करते थे। विरोध पर धमकाने का काम किया करते थे। वहीं पुरूष स्टाफ नर्स अभिनेष रावत का कहना है कि आजतक सीएमएस साहब के द्वारा मुझसे कभी भी शालीनता से बात ही नहीं की गयी। हमेशा जाति-सूचक शब्दों का इस्तेमाल किया जाता था। वहीं स्टाफ नर्स रही प्रीति श्रीवास्तव व ज़रीना का कहना है कि डा. वीबी सिंह ने अस्पताल में अपने भाई, बहनोई व नौकर को पूरे अस्पताल में मरीजों के साथ जबरदस्त तरीके से लूटपाट का काम सौंप रखा है। हालांकि इस बात की भी शिकायते है कि डा. वीबी सिंह अपने भाई की दवा लिखवाने का दबाव कुछ डाक्टरों पर जबरदस्ती बनवाते है। जिसका विरोध भी यदा-कदा देखने को मिलता रहता है। जिला अस्पताल का कमरा न0- 06 और अस्पताल की ओटी में जो चेहरा देखा जाता है उसकी पहचान लोग सीएमएस के भाई के रूप में करते है। प्रभारी सीएमएस का जिम्मा जिस दिन से डा. वीबी सिंह को प्रभार दिया गया है उसी के बाद से कई डाक्टरों ने नौकरी से त्यागपत्र तक दे दिया है। खुद को ईमानदार बताने वाले सीएमएस के कृत्य जगजाहिर हैं। थोड़ा पीछे सत्र 2017-18 में जाया-जाये तो सपा शासनकाल में जिला अस्पताल के उच्चीकरण के लिए करोड़ों रूपये मिले थे। उस समय मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पद पर डा. आरपी सिंह व एसएसएमओ स्टोर के पद पर डा. वीबी सिंह हुआ करते थे। उच्चीकरण के लिए आये हुए करोड़ों के बजट में जमकर भ्रष्टाचार हुआ था। जिसकी जांच शासन स्तर से शुरू हुई थी, परन्तु सरकार बदलते ही साहब के किरदार बदल गये और साहब जिला अस्पताल का प्रभार पा लिये। प्रभार मिलते ही साहब ने अस्पताल को जिस कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है यह बात किसी से छिपी नहीं है। बहरहाल ताज़ा मामला गम्भीर है। यदि निष्कासित स्टाफ नर्सों के द्वारा लगाये गये आरोप (मुख्यमंत्री जी का आदेश फर्जी है) के जरिए हम लोगों की सेवा समाप्त की गयी है तो यह बहुत की बड़ा मामला है। सीधे-सीधे प्रदेश के मुखियां की छवि पर दाग लगाने का अपराध है और यदि आदेश सही है तो उन निष्कासित नर्सों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर कार्यवाही होनी चाहिए। बहरहाल सीएमएस डा. वीबी सिंह पर महिला स्टाफ नर्सों ने जो आरोप लगाये है उसकी जांच होनी चाहिए, चूंकि मामला शासन के मुखियां के आदेश को फर्जी बताकर निष्कासित करने का है। इसकी सही जांच होनी चाहिए। इस सम्बंध में जब डा. वीबी सिंह से बात हुई तो उन्होंने बताया कि लगाया गया सभी आरोप बेबुनियाद है।
नीरज तिवारी

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