18 दिन बाद बस सेवा हुई सामान्‍य, हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी लौटे काम पर

हरियाणा में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल समाप्‍त हो गई है। हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों के शनिवार को काम पर लौट आने से राज्‍य में बस सेवा 18 दिन बाद सामान्‍य हो गई। पूरे राज्‍य में सुबह सभी हड़ताली रोडवेज कर्मचारियों ने काम करना शुरू हो गया। कर्मचारियों ने इस मौके पर जश्‍न मनाया और मिठाइयां बांटकर खुशी जताई। कर्मचारी पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के अादेश पर आज से काम पर लौटे हैं।18 दिन बाद बस सेवा हुई सामान्‍य, हरियाणा रोडवेज के कर्मचारी लौटे काम पर

राज्‍य में हिसार, पानीपत, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल और रोहतक सहित सभी बस डिपो से राेडवेज की बसें सड़कों पर उतर आईं। रोडवेज कर्मचारी शनिवार सुबह की बस स्‍टैंडों व डिपो में पहुंच गए। उन्‍होंने हड़ताल समाप्‍त होने की खुशी में लड्डू बांटे। उन्‍होंने जेल से रिहा किए गए कर्मचा‍रियों का माना पहनाकर स्‍वागत किया। इसके बाद बसों विभिन्‍न रूटों पर चलने लगीं। इससे पिछले 18 दिनों से परेशान यात्रियों को बहुत राहत मिली हैं।

इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक मध्यस्थ की भूमिका निभाते हुए 18 दिनों से जारी हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल को समाप्त करवा दिया। चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की अदालत में कर्मचारी नेताओं द्वारा हड़ताल समाप्त करने पर हामी भरने के  चलते चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी ने अपने आदेश में कहा कि हड़ताल पर गए सभी कर्मचारी शनिवार को 10 बजे से पहले अपनी डयूटी पर लौट आएं।

हड़ताल समाप्‍त होने की खुशी में यमुनानगर बस डिपो पर लड्डू बांटते कर्मचारी।

हाईकोर्ट के बुलाने पर शुक्रवार को अदालत में पेश हुए कर्मचारी नेताओं ने हड़ताल पर गए कर्मचारियों के खिलाफ सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का जिक्र किया। इस पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को हड़ताल के दौरान कर्मचारियों के खिलाफ जारी किए गए बर्खास्तगी, निलंबन या अनुशासनात्मक कार्रवाई के सभी आदेशों फिलहाल रोक लगा दी। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही कर्मचारियों के खिलाफ हरियाणा एस्मा के तहत आरंभ की गई कार्रवाई पर भी रोक लगा दी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि अगर रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन करने के लिए किसी अन्य विभाग में कर्मचारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई है तो उन पर भी हाईकोर्ट के यही आदेश लागू होंगे।

इस मामले पर शुक्रवार को ऑल हरियाणा रोडवेज़ वर्कर्स यूनियन और अन्य कर्मचारी यूनियनों के नेताओं से सीधे तौर पर बात करते हुए चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी ने कहा कि हड़ताल पर जाने से किसी समस्या का समाधान नहीं किया जा सकता। उन्होंने कर्मचारी नेताओं को मौखिक आश्वासन देते हुए कहा कि कर्मचारियों द्वारा हड़ताल समाप्त किए जाने पर अदालत इस बात को सुनिश्चित बनाएगी कि हड़ताल की परिस्थितियों तक पहुंचने वाले इस मुद्दे पर कर्मचारियों के हितों की अवहेलना ना हो। हाईकोर्ट ने कहा कि एक अभिभावक की तरह अदालत इस मामले को एक सर्वमान्य निष्कर्ष तक लाएगी।

हडताल समाप्‍त होने के बाद कुरुक्षेत्र स्‍टैंड से रवाना होती हरियाणा रोडवेज की बस।

सुनवाई के दौरान, अदालत को बताया गया कि हरियाणा सरकार ने इस हड़ताल के दौरान 78 कर्मचारियों को बर्खास्त और करीब 400 कर्मचारियों को निलंबित किया। सुनवाई के दौरान कर्मचारी नेता हरिनारायण शर्मा, बलवान सिंह व सुल्तान सिंह और नसीब जाखड़ ने कर्मचारियों की ओर से अपना पक्ष चीफ जस्टिस के सामने रखा।

चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी ने इस हड़ताल को जल्दी से जल्दी समाप्त किए जाने की जरूरत बताते हुए कर्मचारी नेताओं से कहा कि दीपावली के त्यौहार पर राज्य में लोग सामान्य परिवहन सुविधाओं का लाभ ले पाएं, इसे सुनिश्चित करें। उन्होंने हड़ताल के चलते बर्खास्त या निलंबित हुए कर्मचारियों के परिवारों द्वारा दीपावली मनाने का भी जिक्र किया।

हाईकोर्ट ने सुनवाई को 14 नवंबर तक स्थगित करते हुए हरियाणा के एडवोकेट जनरल बी आर महाजन को निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले दोनों पक्ष बैठक करके हड़ताल के मुहे को सुलझाने का प्रयास करें।

उल्लेखनीय है कि वीरवार को हरियाणा रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के चलते लोगों को हो रही परेशानी के संबंध में हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका में एडवोकेट अरविंद सेठ ने कहा था कि हरियाणा रोडवेज कर्मचारी यूनियनों द्वारा की जा रही इस हड़ताल के कारण लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

गौरतलब है कि हरियाणा सरकार द्वारा किलोमीटर स्कीम के तहत राज्य में 720 निजी बसें चलाए जाने के फैसले के खिलाफ रोडवेज़ के कर्मचारियों ने 16 अक्टूबर से हड़ताल का आहवान किया था। हरियाणा सरकार द्वारा राज्य में एस्मा लगाए जाने के बावजूद हरियाणा रोडवेज़ की कर्मचारी यूनियनों ने इस हड़ताल से पीछे हटने से इंकार कर दिया था।

इससे पहले रोडवेज कर्मचारियों ने सितंबर में भी हड़ताल का आहवान किया था परंतु यह हड़ताल असफल हो गई थी और 16 अक्टूबर की हड़ताल पर हरियाणा सरकार की सख्ती के बाद कर्मचारियो ने अपनी हड़ताल को आगे बढा दिया।

Back to top button