मध्य प्रदेश में दो हीरालाल ने उड़ाई कांग्रेस व भाजपा की नींद

मध्य प्रदेश में नवम्बर में विधानसभा चुनाव होना है। भाजपा 15 साल से लगातार चली आ रही अपनी सत्ता को बचाने के लिए जीतोड़ कोशिश कर रही है, तो कांग्रेस फिर से अपना रुतबा हासिल करने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है। हालांकि इन दोनों पार्टियों की नींद तब उड़ गयी जब महात्मा गांधी की 15०वीं जयंती पर दो संगठन सपाक्स और जय आदिवासी संगठन राजनीतिक दल में तब्दील हो गये।
सपाक्स यानी सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था मध्य प्रदेश के अधिकारियों, कर्मचारियों का संगठन है, तो जय आदिवासी संगठन (जेएएस) आदिवासी समुदाय जुड़ा है। आरक्षण के मुद्दे पर अनारक्षित सरकारी कर्मचारियों की लड़ाई लड़ रहे कर्मचारी संगठन सपाक्स के संरक्षक रहे पूर्व आईएएस हीरालाल त्रिवेदी पार्टी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये गये हैं।
लंबे समय से आदिवासियों के बीच काम कर रहे युवा डॉक्टर हीरालाल अल्वा जय आदिवासी संगठन का नेतृत्व कर रहे हैं। दोनों के फॉलोवरों की संख्या भी ठीक-ठाक है। हाल ही में दोनों ने रैली कर अपनी ताकत का प्रदर्शन भी किया था।
दोनों नये राजनीतिक दलों की ताकत से भाजपा और कांग्रेस वाकिफ हैं। दोनों जानती हैं कि इनकी वजह से वोटों का बंटवारा हो जाएगा। इसीलिए दोनों पार्टियों ने इन्हें अपने संग लाने की कोशिश भी की, लेकिन किसी भी पार्टी को कामयाबी नहीं मिली। अब तो दोनों नये दलों ने ऐलान भी कर दिया है कि वे विधानसभा चुनाव लड़ेंगे। सपाक्स प्रदेश की सभी 23० सीटों, तो जय आदिवासी संगठन 8० सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा। इन 8० सीटों में वे 47 सीटें भी शामिल हैं, जो आदिवासियों के लिए आरक्षित हैं।
भोपाल में सपाक्स के राजनीतिक दल बनने का ऐलान करते हुए हीरालाल ने कहा कि प्रोन्नति में आरक्षण को खत्म करने को कोर्ट ने कहा, लेकिन सरकार उसे बनाए रखने पर आमादा है। एससी/एसटी एक्ट में सुप्रीम कोर्ट द्बारा किए गए बदलाव को रोकने के लिए सरकार संसद में अध्यादेश ले आई। हम चुनाव में इसलिए उतर रहे हैं, ताकि संसद और विधानसभा में पहुंच कर हमारे प्रतिनिधि कानून में जरूरी बदलाव करें।
हीरालाल अल्वा ने धार जिले के कुक्षी कस्बे में एक बड़ी रैली कर चुनाव में उतरने का ऐलान करते हुए कहा कि आदिवासियों को विधानसभा में प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए ही राजनीतिक दल का गठन किया गया, ताकि निचले पायदान पर पड़ा समाज आगे बढ़ सके। इस रैली में वरिष्ठ फिल्म अभिनेता और कांग्रेस के पूर्व सांसद गोविंदा भी शामिल हुए थे। हालांकि गोविंदा ने यह साफ कर दिया था कि वह एक नेता की हैसियत से नहीं, बल्कि कलाकार की हैसियत से कार्यक्रम में शामिल हुये।





