मीडिया में आने का नवजोत सिद्धू का फार्मूला

पंजाब के कैबिनेट मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू आए दिन मीडिया में बने रहने के लिए कोई न कोई ऐसा पैंतरा खेलते हैं, जिसका कोई सिर-पैर ही नहीं होता। ताजा बयान में सिद्धू ने पंजाब में अफीम की कृषि का समर्थन कर नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि उनके बयान का उनके ही एक साथी ने विरोध भी किया और किसी भी मंत्री ने सिद्धू के बयान का समर्थन नहीं किया, क्योंकि पंजाब के लोग पहले ही नशों का दंश झेल रहे हैं और कोई भी नेता इस मामले में गैर-जिम्मेवारी की बयानबाजी से बचना ही चाहता है।
मंत्री तृप्त राजिन्द्र सिंह बाजवा ने सिद्धू के बयान का विरोध करते हुए कहा कि नशा रोकने के लिए दूसरा नशा नहीं दिया जा सकता। इसी तरह मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह ने भी कहा अफीम की कृषि की अनुमति देकर वह पंजाब के युवाओं को बर्बाद नहीं करना चाहते। सिद्धू ने दलील दी कि उसके चाचा ने अफीम का सेवन कर लम्बी उम्र तक जीवन व्यत्तीत किया है। पहली बात सिद्धू जिस पीढ़ी की बात करते हैं उस पीढ़ी के और लोग भी बिना अफीम के सेवन से उसके चाचे से भी ज्यादा उम्र काट चुके हैं। पंजाब के इतिहास में कहीं भी लिखा नहीं मिलता कि पंजाबी अफीम खाने के कारण स्वस्थ थे और पहलवानी करते थे।
पंजाब हरियाणा जैसे राज्यों में दूध-घी को मुख्य खुराक माना गया था। अफीम खाने वाले व्यक्तिय् के लिए पंजाब में ‘अमली’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता था और उस वक्त अफीम खाने वाले को सामाजिक तौर पर अच्छा नहीं माना जाता था। नवजोत सिद्धू ने पंजाब के इतिहास, खाने-पीने, कुश्ती लड़ने के लिए प्रसिद्ध पंजाब को एक तरफ रखते हुए अफीम के गुण गाने शुरू कर दिए हैं। जहां तक अफीम के सेवन का संबंध है, अफीम का सीधा सेवन डाक्टरी नजरिए से गलत है जो कई रोगों को जन्म देता है। अफीम का केवल दवाओं में प्रयोग किया जा सकता है।
नशों की बढ़ रही महामारी को रोकने के लिए नशे का विकल्प देना उचित नहीं बल्कि यह बात समस्या का समाधान निकालने की बजाय उसे बढ़ाने वाली है। अहम संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों को अफीम खाने का समर्थन करने की बजाय युवाओं को नशों से बचाने के लिए कुछ प्रयास करने चाहिए। अफीम सेवन से न तो कोई मैडल मिलते हैं और न ही कोई स्वस्थ सेहत। सिद्धू का राजनीतिक फार्मूला उसे मुख्य समाचार में ले आता है लेकिन यह चीजें समाज के लिए खतरनाक है। नि:संदेह किसी गहरी जानकारी के हर बात में ज्ञान घोटने का रुझान समाज में बेवजह की बहस छेड़ता है। राजनेताओं को हर बात समाज के हित में व जिम्मेदारी से ही करनी चाहिए।
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