अगर google doodle पर गांधी नहीं दिखे, तो न हों हैरान…
लखनऊ : ट्विटर ने जहां गांधी पर इमोजी बनाई है वहीं google doodle ढूंढने वालों को निराशा मिली। कुछ लोगों को यह भी लगा कि शायद गूगल ने गांधी को भुला दिया। तो आइये आपको बताते हैं कि गूगल पर किसी भी व्यक्ति पर एक ही बार डूडल लगता है और google doodle नहीं बनाता है इसे कोई भी बनाकर भेज सकता है जिसे गूगल एप्रूव करके लगा देता है।google doodle पर अब तक प्रमुख भारतीयों में महात्मा गांधी, रबीन्द्रनाथ टैगोर, सरोजनी नायडू, भीमराव अम्बेडकर, श्रीनिवास रामानुजम, एमएफ हुसैन, जगजीत सिंह, बेगम अख्तर, एस. चंद्रशेखर, नैन सिंह रावत, अब्दुल कवी देस्नवी, सितारा देवी, अनसुइया साराभाई, कोर्नेलिया सोराबजी, व्ही. शांताराम, रुखमाबाई राउत, नूतन और आरके लक्ष्मण पर डूडल आए हैं।
इनमें गांधी पर दो बार 2009 व 2015 में google doodle पर आए हैं।google doodle एक विशेष अस्थायी परिवर्तन है जो गूगल के होमपेज पर लोगो को बदलकर किया जाता है ताकि छुट्टियों, घटनाओं, और लोगों की उपलब्धियों को मनाया जा सके।पहला google doodle 1998 के बर्निंग मैन फेस्टिवल के सम्मान में था, और लैरी पेज और सेर्गेई ब्रिन द्वारा इसे डिजाइन किया गया था ताकि सर्वर के दुर्घटनाग्रस्त हो जाने पर उनकी अनुपस्थिति, उपयोगकर्ताओं को सूचित हो जाये। डूडल का आयोजन और प्रकाशन कर्मचारियों की एक टीम द्वारा किया जाता है जिन्हें ‘डूडलर्स’ कहा जाता हैजब भी कोई स्पेशल डे होता है तो सबसे पहले गूगल अपनी तस्वीर को बदल देता है। हम सभी गूगल का इस्तेमाल करते हैं। और रोजाना गूगल की ओर से डाली गई तस्वीरों को देखते हैं। कई बार तो गूगल की तस्वीर को देखकर हमें पता चलता है कि कोई खास दिन है।





