कानपुर की शाइस्ता आवाज ने ,मजरूह की रूह खुश करने के लिएजमाई महफिल, बांधा समां

नई न्यूज़ :  “मैं अकेला ही चला था जानिबे मंजिल मगर, लोग साथ आते गये और कारवाँ बनता गया” इन पंक्तियों के जनक विश्व प्रसिद्ध शायर व गीतकार ‘मजरूह सुल्तानपुरी’ के 99 वें जन्मदिन के अवसर पर सोमवार की रात बल्दीराय के सेंट जॉन्स कान्वेंट स्कूल में आल इंडिया मुशायरा व कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें कानपुर की शाइस्ता सना की इन पंक्तियों “हमने देखा है दो वक्त की रोटी के लिए, अब तो माँ-बाप का बटवारा किया जाता है” ने समां बांध दिया।कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि राज्य सभा सांसद डॉ संजय सिंह व इसौली विधायक अबरार अहमद ने दीप जलाकर किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता इसौली विधायक अबरार अहमद ने किया।
वसीम रामपुरी ने शेर पढ़ा- “मेरे खुदा मेरा भारत महान हो जाये,जमीन हिंद की एक आसमान हो जाय”। कवि/शायर विकास बौखल ने ये पंक्तियां “ये किसी शख्स को दोबारा न मिलने पाये, प्यार के रोग को आधार से जोड़ा जाये” पढ़कर वाहवाही लूटी।शायरा शाइस्ता सना कानपुरी की ग़ज़ल- “एक अनमोल निशानी की तरह रखा है, तेरा गम आंख में पानी की तरह रख्खा है” पढ़ कर महफ़िल में रंगीनियत भरी। कवि कर्मराज शर्मा तुकांत ने पढ़ा- “कपड़े की मानिंद सखे यूँ रंग न बदलो,अपने जाएं रूठ प्रिय यूँ ढंग न बदलो, बदल झको तो बदलो मन के भावों को,मौसम भी शरमाये ऐसे रंग न बदलो” पढ़कर तालियां बटोरी।
संचालन कर रहे हिलाल बदायूनी ने पढ़ा-“करीब से तेरा दीदार हो गया होता,मैं तेरी सुबह का अखबार हो गया होता” पढ़कर वाहवाही लूटी। कार्यक्रम का आयोजन मजरूह सुल्तानपुरी वेलफेयर सोसाइटी व संचालन हिलाल बदायूंनी ने किया।इस मौके पर पूर्व सांसद ताहिर खान, जिला पंचायत प्रतिनिधि शिवकुमार सिंह, कुड़वार प्रमुख फिरोज खान,डॉ नफीस अहमद, जिगर सुल्तानपुरी, मोसीर अहमद, एडवोकेट नफीस अहमद, शिवम श्रीवास्तव, कुन्नू,बबलू, राम चन्द्र यादव, डॉ सुल्तान अहमद अख्तर खान, डॉ सूरज वैश्य, वसीक अहमद, वसीम,प्रधान मोहम्मद असलम, करिया यादव, महेश जायसवाल, तफ़्सीर, सहीम अहमद व थानाध्यक्ष अशोक कुमार सहित सैकड़ो लोग मौजूद रहे।

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