मिशन 2019 को लेकर अपनी पसंदीदा सीट बचाने के लिए RJD नेता ने अपनाए ये हथकंडे
पटना। बिहार में राजद, कांग्रेस, हम और वामदलों को दोस्ती में अपने ही सिपहसालारों के स्वार्थ से पेंच फंस रहा है। लोकसभा की करीब आधा दर्जन ऐसी सीटें हैं, जिनपर सहयोगी दलों के साथ ही राजद के वरिष्ठ नेताओं की भी टकटकी लगी है।
पिछले लोकसभा चुनाव में सहज गठबंधन के कारण इस बार भी राजद-कांग्रेस की कुंडली मिलाने में दिक्कत नहीं हो रही है। जीतनराम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को भी कमोबेश अंगीकार कर लिया गया है। राजद को असली दिक्कत वामदलों, सपा और शरद यादव की नई पार्टी के साथ तालमेल में आ रही है।
झंझारपुर सीट पर समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र प्रसाद यादव का दावा है।
लालू प्रसाद की ओर से उन्हें आश्वस्त भी कर दिया गया है, लेकिन राजद के वरिष्ठ नेता एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मगनीलाल मंडल का मन डोल रहा है। मंडल ने पिछला चुनाव राजद के टिकट पर झंझारपुर से ही लड़ा था। लालू अगर मुलायम सिंह को खुश करना चाहेंगे तो मगनीलाल का मंझधार में फंसना तय है।
बेगूसराय की सीट सीपीआइ की झोली में जाती दिख रही है, जहां से कन्हैया कुमार को प्रत्याशी बनाया जाना है। ऐसा हुआ तो राजद के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. तनवीर हसन की हसरत इस बार अधूरी रह जाएगी। हसन ने पिछला चुनाव बेगूसराय से दमदारी से लड़ा था।
जमुई सीट पर पिछली बार राजद ने सुधांशु शेखर भास्कर को प्रत्याशी बनाया था। चिराग पासवान को उन्होंने कड़ी टक्कर दी थी। अबकी जदयू से बगावत करके शरद यादव के साथ गए पूर्व स्पीकर उदय नारायण चौधरी महागठबंधन का प्रत्याशी बनना चाह रहे हैं। सुधांशु की कोशिश चौधरी की राह रोकने की है।
किधर जाएंगी कांति सिंह
पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राजद की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कांति सिंह की व्यथा सबसे बड़ी है। पिछली बार काराकाट में रालोसपा के उपेंद्र कुशवाहा से हार गई थीं। इसलिए इस बार उनकी नजर औरंबागाद और आरा पर है। औरंगाबाद की सीट कांग्र्रेस के निखिल कुमार के लिए रिजर्व है और आरा पर माले का हक बनता है।
कांति की कोशिश है कि माले से गठबंधन की स्थिति नहीं बने तो आरा सीट पर उन्हीं की एकमात्र दावेदारी बने। अगर उपेंद्र कुशवाहा पाला बदलकर महागठबंधन में शामिल हो जाते हैं तो कांति की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
ऐसे में कांति के लिए न काराकाट बचेगा न आरा और न औरंगाबाद। जाहिर है, कांति किसी भी तरह आरा को अपने लिए बचाना चाहती हैं। पिछली बार राजद के टिकट पर यहां से भगवान सिंह कुशवाहा लड़े थे, जो अब रालोसपा में हैं।





