दिल्ली में भारी वाहनों के प्रवेश पर लगाम लगाने की तैयारी में सरकार, दुर्घटनाएं होंगी कम

दिल्ली में आधीरात के बाद होने वाले 70 प्रतिशत सड़क हादसे ट्रकों से होते हैं और उनमें भी 60 प्रतिशत ऐसे होते हैं जो शहर में नहीं आने चाहिए लेकिन फिर भी एंट्री करते हैं। हालांकि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे बनने के बाद और अक्टूबर में वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे खुलने के बाद निश्चित ही दिल्ली में ट्रकों से होने वाली दुर्घटनाओं में कमी आएगी।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के अनुसार ये दोनों ही एक्सप्रेसवे जो दिल्ली के बाहर-बाहर रिंग रोड जैसा काम करेंगे वो दिल्ली में किसी भी ट्रक को नहीं आने देंगे। ज्वाइंट ट्रैफिक कमिश्नर दिल्ली पुलिस आलोक कुमार ने बताया कि अगस्त में 62000 से भी ज्यादा वाहन ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे का इस्तेमाल कर दिल्ली से गुजरे। जब वेस्टर्न पेरिफेरल खुल जाएगा तो स्थिति और बेहतर होगी। यह कहना मुश्किल होगा कि ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल का इस्तेमाल कर कितने वाहन गुजरेंगे लेकिन इनकी संख्या अच्छी खासी होगी। अभी लगभग 1.5 लाख माल और पैसेंजर वाहनों की दिल्ली में एंट्री होती है। 

ट्रांसपोर्ट प्लानिंग के प्रोफेसर सेवा राम ने बताया कि, अधिकतर एक्सीडेंट हाईवे के पास होते हैं और दिल्ली में होने वाले एक्सीडेंट के जो ब्लैक स्पॉट हैं वो नेशनल हाईवे के आसपास हैं। उन्होंने बताया कि हमारे आंकड़ों के अनुसार 44 प्रतिशत दुर्घटनाओं में माल वाहन शामिल होते हैं। अगर ये वाहन नेशनल हाईवे से हटा लिए जाएं जो कि पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की वजह से होगा तो फिर दुर्घटनाओं में भी कमी आ जाएगी।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट के प्रोग्राम मैनेजर गौरव दूबे ने बताया कि, देर रात में अधिकतर दुर्घटनाएं इसलिए होती हैं क्योंकि सड़कें खाली होती हैं तो लोग गाड़ियां तेज चलाते हैं। इनमें माल ढोने वाले ट्रकों की  वजह से घातक एक्सीडेंट होते हैं। अगर इन भारी वाहनों को सड़क से हटा दिया जाए तो एक्सीडेंट की संख्या काफी कम की जा सकती है। हालांकि इसका कोई आंकड़ा नहीं है। कई वाहन बिना वजह दिल्ली में आ जाते हैं वेस्टर्न पेरिफेरल बनने से इन्हें अपना समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। 

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