नेताओं के दबाव में होते हैं पुलिस विभाग में तबादले, हुई चिट्ठियां वायरल
लखनऊ। पुलिस महकमे में कप्तान से लेकर सिपाही तक के तबादलों में राजनीतिक हस्तक्षेप कोई नई बात नहीं है। खासकर प्राइम जिलों की पोस्टिंग को लेकर खाकी में खादी का दखल और बढ़ जाता है। सोशल मीडिया पर भाजपा नेताओं की सिफारिशी चिट्ठियां भी वायरल होती रही हैं। पत्रों के जरिए नेताओं ने अधिकारियों की उनकी बात न सुनने का दर्द भी साझा किया है।
ट्रांसफर-पोस्टिंग में सिफारिशों की कड़ी में ताजा मामला डीजी तकनीकी सेवाओं का जिलों के कप्तानों को लिखा गया पत्र है। सोशल मीडिया पर वायरल पत्र में कहा गया है कि 31 कंप्यूटर आपरेटर ग्रेड-ए अपने स्थानान्तरण के लिए राजनैतिक प्रभाव का उपयोग कर मनचाही पोस्टिंग हासिल करने की कोशिश की। उन्होंने सिफारिश करने वाले मंत्री, सांसद व विधायक के नाम की सूची भी जारी की है।
साथ ही कप्तानों को अपने जिले में तैनात दबाव बनाने वाले कंप्यूटर आपरेटरों को चेतावनी देने की बात कही है। माना जा रहा है कि डीजी नेताओं की सिफारिश से बेहाल हैं। इससे पूर्व सोशल मीडिया पर मार्च माह में बिजनौर के विधायक कुंवर सुशांत कुमार सिंह का पत्र वायरल हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री से गोंडा के एसपी उमेश कुमार सिंह को एसपी बिजनौर बनाए जाने की सिफारिश की गई थी।
ऐसे ही इससे पूर्व अंबेडकरनगर की एक महिला विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जिले के डीएम-एसपी को हटाए जाने की मांग की थी। यह पत्र भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पत्र में महिला विधायक ने यह भी कहा था कि दोनों अधिकारी उनका फोन नहीं उठाते हैं। ऐसे ही बाराबंकी के एक पूर्व एसपी को एक मंत्री का संरक्षण हासिल होने की चर्चाएं आम थीं।
मुकर गए डीजीपी
डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग में नेताओं का दबाव नहीं रहता। डीजी तकनीकी सेवाओं का पत्र उनके संज्ञान में नहीं है। वहीं डीजी तकनीकी सेवाओं को कई बार मोबाइल पर कॉल की गई, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
पहले से ही दखल न देने की हिदायत
‘नेतृत्व और संगठन ने पहले से ही यह स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी जनप्रतिनिधि प्रशासनिक कार्यों में दखल नहीं देगा। हालांकि व्यवहारिक रूप से देखें तो जनहित और विकास के दृष्टिगत जनप्रतिनिधि को पत्र लिखने की जरूरत पड़ती है। और फिर फैसला तो शासन को करना होता है। इसमें दबाव जैसी कोई बात नहीं है।





