ग्रेटर नोएडा में अब इस जगह बनेगा डंपिंग ग्राउंड, निरीक्षण करेंगे अधिकारी
इसके बाद अगले चरण में टीम ग्रेटर नोएडा के कुछ अन्य स्थानों पर जाएगी। वहां भी कूड़ा डालने का विकल्प तलाशा जाएगा। सूत्रों की मानें तो शुक्रवार को सीईओ आलोक टंडन, एसीईओ राकेश कुमार मिश्र, प्रोजेक्ट इंजीनियर आरएस यादव, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की ओएसडी विभा चहल सहित दूसरे जीएम स्तर के अधिकारी अस्तौली की साइट पर पहुंचे।
बताया जा रहा है कि अस्तौली जाने के लिए 70 किलोमीटर का सफर नोएडा से तय करना पड़ेगा। यह बुलंदशहर की सीमा से सटा हुआ क्षेत्र है। यही नहीं यहां पर जाने के लिए संपर्क मार्ग भी नहीं है। साइट तक गाड़ी नहीं जा सकती है।
अगर घूम कर जाएंगे तो यहां जाने पर और ज्यादा समय और दूरी तय करनी होगी। इसके अलावा यहां अभी बाउंड्री का काम भी नहीं हुआ है। यहां पर रास्ते में क्रॉसिंग भी है और रास्ता संकरा है।
बताया जा रहा है कि यहां के विकल्प पर अगर हामी नहीं हुई तो ग्रेटर नोएडा में कुछ अन्य विकल्पों की भी तलाश की जाएगी, जहां डंपिंग ग्राउंड बनाया जा सकता है। मामला सीधे मुख्यमंत्री से जुड़ा हुआ है इसलिए इसे पहली प्राथमिकता में लिया जा रहा है। संभव है कि शनिवार को नोएडा और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम अन्य स्थानों का निरीक्षण कर संभावनाओं की तलाश करे।
सेक्टर-151ए के आसपास भी फैली है आबादी
नोएडा प्राधिकरण के मास्टर प्लान में सेक्टर-151ए में भी डंपिंग ग्राउंड का विकल्प दिया गया है, लेकिन आबादी बसाने के दौरान नियमों की परवाह किए बिना प्लॉट काटे गए। अब हालात यह है कि वहां भी साइट से करीब 500 मीटर पर आबादी की बात बताई जा रही है। अगर यहां कूड़ा डालना शुरू किया गया तो संभव है कि विरोध शुरू हो जाए।
इस बात का संकेत ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने दिया। इसके लिए सिरसा गोलचक्कर से अस्तौली तक के लिए 24 मीटर का रोड बनाकर ले जाया जाएगा और वहां तक पहुंचने के रास्ते को सुगम किया जाएगा। यह सब कुछ ग्रेटर नोएडा का कूड़ा वहां डालने के लिए किया जाएगा।
किसानों ने कहा हमारे गांव की ओर देखना भी मत
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक सेक्टर-123 में हंगामे के दौरान सेक्टर-151ए और अस्तौली के किसान प्राधिकरण अधिकारियों के लगातार संपर्क में बने रहे। यही नहीं वहां के किसानों ने सीधे तौर पर अधिकारियों को पिछले दिनों आगाह भी किया हुआ था कि सेक्टर-123 में कूड़ा डालने का विचार छोड़ने पर हमारे ओर मत चले आना। उन्होंने कहा कि हमारे गांव की ओर देखना भी मत। संभव है कि प्राधिकरण के वहां जाने के बाद वहां भी विरोध शुरू हो जाए।





